इतिहास के पन्नों से

  • 15 जुलाई 2011

वर्ष 1997 में 15 जुलाई को ही फ़ैशन डिज़ाइनर जियानी वरसाची की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी जबकि 1995 में स्रेब्रेनिका से मुस्लिम शरणार्थियों को बोस्नियाई सर्ब लोगों ने बाहर निकाल दिया था.

1997: फ़ैशन डिज़ाईनर वरसाची की हत्या

Image caption वरसाची के घर के सामने ही उनकी हत्या हुई थी

15 जुलाई, 1997 को इटली के जाने माने फ़ैशन डिज़ाईनर जियानी वरसाची की किसी अज्ञात व्यक्ति ने मियामी स्थित उनके आवास की सीढ़ियों पर गोली मार कर हत्या कर दी थी.

सुबह करीब नौ बजे ये घटना तब हुई जब 50 वर्षीय वरसाची एक न्यूज़ कैफ़े से सुबह का नाश्ता और अखब़ार खरीद कर घर लौट रहे थे.

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बीस और तीस बर्ष की आयु के बीच के एक श्वेत वर्ण के व्यक्ति ने अपने थैले से बंदूक निकाल कर वरसाची के सिर में दो गोलियां दाग दीं.

घटना के बाद लाल रंग की एक शेवरले ट्रक में एक पिस्तौल और कुछ कपड़े बरामद किए गए थे.

बाद में पुलिस ने इस हथियार के मालिक के बारे मे जानकारी दी.

बताया गया कि ये पिस्तौल 27 वर्षीय एक समलैंगिक यौनकर्मी एन्ड्र्यू कनानन की थी और उनके कई 'रईस ग्राहक' थे.

ये व्यक्ति पहले से ही एफ़बीआई की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल था और उस पर चार और हत्याओं के आरोप थे.

ख़ास बात है की ये चारों व्यक्ति फ़ैशन डिज़ाइनर जियानी वरसाची की तरह ही समलैंगिक थे.

1995: मुस्लिम शरणार्थियों को बाहर निकाला

Image caption मुस्लिम शरणार्थियों के संहार की कई घटनाएं सामने आईं थीं

पंद्रह जुलाई को ही स्रेब्रेनिका से मुस्लिम शरणार्थियों को बोस्नियाई सर्ब लोगों ने बाहर निकाल दिया था.

बोस्नियाई सर्ब लोगों ने हज़ारों मुस्लिम शरणार्थी को कब्ज़े में लिए गए स्रेब्रेनिका के 'सुरक्षित इलाक़े' से बहार निकालना शुरू कर दिया था.

संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों ने इसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का ये सबसे बड़ा 'जातीय संहार' क़रार दिया था.

क़रीब 40 हज़ार औरतों, बच्चों और बूढ़ों को पोटोकारी इलाक़े को खाली करने के आदेश दे दिए गए.

ये शरणार्थी इस शिविर में डच शांति सुरक्षा सेना के घेरे में रह रहे थे.

डच सुरक्षाकर्मी संयुक्त राष्ट्र सेनाओं के अंतर्गत तैनात थे और माना गया कि ये स्रेब्रेनिका को सर्बियाई लोगों से बचाने के लिए सक्षम साबित नहीं हुए.

ख़बरों में कहा गया था कि 16 वर्ष की आयु से बड़े सभी मुस्लिम युवाओं को घेरे में लिया गया है हालांकि इन ख़बरों की पुष्टि नहीं हो सकी.

बताया जा रहा है कि ये मुस्लिम युवा हमला करने वाले सर्बियाई मूल के लोगों से बच कर भाग रहे थे.

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