इमाम छुड़वायेंगे धुंए की लत

  • 15 जुलाई 2011
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Image caption अभियान के तहत रमज़ान में इमाम मस्जिदों में धूम्रपान छोड़ने की सलाह देगे.

ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन ने मुसलमानों में सेहत के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए पवित्र ग्रंथ कुरान की आयतों का सहारा लिया है.

मुस्लिम धर्म मानने वालों के लिए संदेश ये है कि स्वस्थ मुसलमान ही एक धर्मनिष्ठ मुसलमान होता है.

ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा ने मैनचेस्टर में स्वस्थ रमज़ान अभियान की शुरूवात की है.

रमज़ान का पवित्र महीना इस साल एक अगस्त से शुरू हो रहा है. रमज़ान के दौरान मुसलमान उपवास रखते हैं यानि दिन में या उजाला रहने तक वो न तो कुछ खाते हैं और न ही कुछ पीते हैं.

धूम्रपान के ख़तरे

देखा गया है कि दक्षिण एशियाई देशों की आबादी में विश्व के अन्य देशों की जनसंख्या के मुकाबले मधुमेह और दिल की बीमारी होने की संभावना 50 फ़ीसदी ज़्यादा होती है.

ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन का कहना है कि दिल की बीमारी का एक मुख्य कारण धूम्रपान करना है और इसकी वजह से धूम्रपान करने वालों में दिल का दौरा पड़ने की आशंका कभी भी धूम्रपान न करने वालों की तुलना में लगभग दोगुनी होती है.

इस्लाम धर्म के विद्वान शेख़ ऐताबिक के मुताबिक धूम्रपान करना ठीक उसी तरह का पाप है जैसे काले जादू का इस्तेमाल करना.

मैनचेस्टर में स्वास्थ्य सलाहकार खा़लिद अनीस लोगों को सेहतमंद भोजन न खाने, व्यायाम न करने और धूम्रपान से होने वाले ख़तरों से आगाह कराते हैं.

इस अभियान की शुरूवात एक रेंस्तरा में की गई, जहाँ इमाम, इस्लाम धर्म के मानने वालों समेत सैकड़ो स्वास्थ्य कार्यकर्ता और डॉक्टर मौजूद थे.

यहाँ दिखाया गया कि किस तरह धूम्रपान, तंबाकू या पान चबाने से फेफड़ों, मुहं और जबड़े को घातक नुकसान होता है.

इस जागरूकता अभियान के तहत इमामों को प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वो रमज़ान के महीने में मस्ज़िदों में आने वाले लोगों को धूम्रपान छोड़ने की सलाह दे सकें.

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