सोमालिया में बाल सैनिकों की बहाली

  • 20 जुलाई 2011
सोमालिया इमेज कॉपीरइट Reuters

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि सोमालिया में बच्चे युद्ध अपराधों को झेल रहे हैं, इनमें बाल सैनिकों की सुनियोजित भर्ती भी शामिल है.

इस्लामी कट्टरपंथियों और पश्चिम के समर्थन से बनी सरकार में लंबे समय से संघर्ष चल रहा है. सोमालिया छोड़कर पड़ोसी इथियोपिया और कीनिया चले गए लोग इस संघर्ष को एक वजह बताते हैं.

देश छोड़ चुके दो सौ से ज़्यादा सोमाली लोगों से इंटरव्यू के आधार पर एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि हथियारबंद दस्ते में बच्चों की भर्ती प्रचलित है.

इनमें से ज़्यादातर बच्चे 10 से 17 साल के होते हैं. लेकिन कई तो सिर्फ़ आठ साल के हैं.

तरीक़े

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस्लामी कट्टरपंथी गुट अल शबाब बच्चों को मोबाइल फ़ोन और पैसा देकर बहकाने से लेकर बच्चों के अपहरण और स्कूलों पर छापेमारी तक के तरीक़े अपनाता है.

एमनेस्टी का कहना है कि फ़्रंट लाइन पर लड़ाई करने के अलावा ये बच्चे अन्य भूमिकाएँ भी निभाते हैं. जैसे कि वे पोशाकों को लेकर अल शबाब के कड़े नियमों के पालन के लिए महिलाओं और लड़कियों को कोड़े भी मारते हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि सोमालिया में अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के उल्लंघन से निपटने में नाकामी ऐसे समय हो रही है जब समुद्री लुटेरों के ख़िलाफ़ संघर्ष में सारे संसाधन लगाए जा रहे हैं.

जबकि इनसे सोमालिया के बच्चे और युवा बड़ी संख्या में प्रभावित हुए हैं. एमनेस्टी का कहना है कि ये कोई मानवीय संकट नहीं है, बल्कि ये बाल संकट है.

रिपोर्ट में सोमालिया की अस्थायी सरकार को भी बाल सैनिकों के इस्तेमाल पर आड़े हाथों लिया गया है. एमनेस्टी ने इस पर सवाल उठाया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब भी उन्हें सैनिक सहायता क्यों दे रहा है.

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