फ़ाई मामले पर भारत में बवाल

सैयद अली शाह गिलानी
Image caption गिलानी ने फ़ाई की गिरफ़्तारी की आलोचना की है

अमरीका में पकड़े गए कश्मीरी लॉबिस्ट ग़ुलाम नबी फ़ाई के आयोजनों में भारतीय मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, पत्रकारों और कश्मीरी अलगाववादी नेताओं के शामिल होने का मामला तूल पकड़ रहा है.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने अपने सूत्रों के हवाले से ख़बर दी है कि सुरक्षा एजेंसियाँ उन लोगों से पूछताछ कर सकती हैं, जिन्होंने फ़ाई की ओर से आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लिया.

मंगलवार को अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी एफ़बीआई ने बिना पंजीकरण के पाकिस्तान सरकार की ओर से कश्मीर के लिए लॉबी करने के आरोप में फ़ाई को गिरफ़्तार किया है.

एफ़बीआई ने अदालत में दाख़िल अपने हलफ़नामे में फ़ाई पर आरोप लगाया है कि उन्हें पाकिस्तान सरकार के तत्वों और ख़ासकर ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई की ओर से ऐसे कार्यक्रमों और लॉबिंग करने के लिए पैसे मिलते थे.

पूछताछ

पीटीआई ने अपने सूत्रों के हवाले से बताया है कि भारतीय गृह मंत्रालय एफ़बीआई की ओर से दाख़िल हलफ़नामे का अध्ययन कर रहा है और जल्द ही कई लोगों के इस संबंध में पूछताछ हो सकती है.

आरोप है कि फ़ाई की ओर से कश्मीर पर आयोजित कई कार्यक्रमों में भारत के कई बुद्धिजीवी, पत्रकार, मानवाधिकार कार्यकर्ता और अलगाववादी नेताओं ने भी हिस्सा लिया.

कश्मीर अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने तो फ़ाई की गिरफ़्तारी की आलोचना की है और इसे भारत की कूटनीतिक साज़िश करार दिया है.

गिलानी ने कहा, "फ़ाई पिछले 32 वर्षों से कश्मीरी लोगों के पलायन का मुद्दा उठा रहे थे. कश्मीर के लिए निर्भीक समर्थन की वजह से वे भारत की आँखों की किरकिरी बन गए थे."

जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ़्रंट ने भी फ़ाई की गिरफ़्तारी की आलोचना की है और कहा है कि उनकी गिरफ़्तारी अहिंसा के लोकतांत्रिक रास्ते के ख़िलाफ़ है.

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