लौट रहे हैं तमिल विस्थापित

  • 21 जुलाई 2011
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Image caption विद्रोहियों और सेना के बीच चले युद्ध के कारण कई लोगों को घर छोड़ना पड़ा था

श्रीलंका में हिंसक गृहयुद्ध ख़त्म होने के दो साल बाद तमिल इलाक़ों से विस्थापित हुए कोई तीन लाख लोग दो साल बाद अपने घर वापस लौट रहे है.

तमिल विद्रोहियों और श्रीलंकाई सेना के बीच संघर्ष के दौरान उत्तरी श्रीलंका के ज़्यादातर हिस्सों से लोग अपने गाँवों से भाग गए थे.

इन गाँवों पर तमिल विद्रोहियो का नियंत्रण था. बाद में सेना के अभियान छेड़ने के बाद इन गाँवों से लोगों को भागना पड़ा.

अपने गांव लौटा एक परिवार अपना रैन बसेरा फिर से जो़ड़ने की कोशिश कर रहा है.

इस परिवार के प्रमुख चंद्रासीगरन थायाकरन कहते है,"हम बेहद खुश हैं कि हम शरणार्थी शिविर से अपने गाँव वापस आ गए है. लेकिन मैंने अपनी माँ, छोटे भाई और मेरे बड़े भाई-बहन को इस युद्ध में खो दिया.हम यहाँ अपने परिवार को खोकर लौटे हैं."

विस्थापित लोगों के शरणार्थी शिविर से वापस लौटने पर भी अन्य प्रभावित लोगों की तरह से संयुक्त राष्ट्र की तरफ से सहायता राशि दी गई लेकिन उन्हें उससे भी हाथ धोना पड़ा.

सहायता

अब प्रभावित परिवार सेव द चिल्ड्रन संस्था की सहायता से अपने घर बना रहे है.

श्रीलंका के उत्तरी भाग पर लंबे समय तक तमिल विद्रोहियों का शासन रहा था.

इस क्षेत्र में दो साल से ज़्यादा समय तक युद्ध चला जिसकी वजह से यहाँ आबादी नहीं के बराबर रह गई है.

विद्रोहियों ने इन लोगो को अपना घर छोड़ने को मज़बूर किया और न जाने इस दौरान कितने ही लोग मारे भी गए थे.

किलिनोच्ची शहर के प्रमुख अधिकारी का कहना है कि जो लोग वापस लौट रहे है उन्हें सरकार प्रशिक्षण दे रही है और नकद देकर सहायता भी कर रही है.

लेकिन कुछ लोगो का कहना है कि उन्हें कुछ भी नहीं मिला है क्योंकि वह सहायता राशि के दायरे से बाहर रह गए थे.

सरकार का कहना है कि वह देश के उत्तरी क्षेत्र में विकास का काम कर रही है लेकिन लंबी सड़कों और ऊर्जा परियोजना से अभी तक सभी को लाभ नहीं हुआ है.

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