इतिहास के पन्नों से

इतिहास के पन्ने पलटें तो 24 जुलाई का दिन कई वजहों से याद किया जाएगा. वर्ष 1974 में इसी दिन अमरीकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन को वाटरगेट मामले से जुड़े सारे टेप्स पुलिस के हवाले करने का आदेश दिया था. इसके अलावा इसी दिन 1987 में जानेमाने उपन्यासकार जेफ़रे आर्चर ने द डेली स्टार अख़बार के ख़िलाफ़ लाख़ो पाउंड का मानहानि का मुक़दमा जीता था.

1974: राष्ट्रपति निक्सन को वाटरगेट मामले से जुड़े टेप्स को समर्पण करने का आदेश

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Image caption वाटरगेट स्कैंडल पत्रकारिता के इतिहास में भी मील का पत्थर माना जाता है.

अमरीकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन को आदेश दिया कि वो वाटरगेट स्कैंडल से जुड़े सारे टेप्स जांच एजेंसियों के हवाले कर दें.

खचाखच भरी अदालत में फ़ैसला सुनाते हुए मुख्य न्यायाधीश वॉरेन ई बर्गर ने राष्ट्रपति के विशेषाधिकार को नकारते हुए कहा कि एक आपराधिक मामले मे सबूत के तौर पर टेपों की ज़रूरत है.

राष्ट्रपति निक्सन ने हाईकोर्ट के फ़ैसले को चुनौती दी थी.

विशेष अभियोजक लिओन जावोर्सकी ने आरोप लगाया था कि उन टेपों में इस बात के सबूत है कि राष्ट्रपति निक्सन ख़ुद वाटरगेट मामले को दबाने में शामिल थे.

दरअसल ये सारा मामला 1972 में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के दफ़्तर में चोरी का है.लेकिन ये सिर्फ़ मामूली चोरी का मामला नहीं था बल्कि चोरी करने वाले ख़ुफ़िया कागज़ातों की फ़िल्म बना रहे थे और उनके दफ़्तर में जासूसी के लिए उपकरण लगा रहे थे.

मीडिया में ख़बर आने के बाद इस मामले ने तूल पकड़ा और मामला अदालत तक पहुंचा. यहां तक कि संसदीय समिति ने राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव लाने का फ़ैसला किया था. लेकिन उस पर बहस शुरू होने से पहले ही आठ अगस्त को निक्सन ने राष्ट्रपति के पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

नए राष्ट्रपति फ़ोर्ड ने निक्सन को माफ़ी देदी जिससे उनपर मुक़दमा नहीं चला लेकिन इस मामले में कुल मिलाकर 40 सरकारी अधिकारियों को या तो दोषी पाया गया उन्हें जेल जाना पड़ा.

1987: जेफ़री आर्चर ने लाखों पाउंड का मानहानि का मुक़दमा जीता

Image caption मानहानि का ये मुक़दमा कई दिनों तक मीडिया की सुर्ख़ी बना रहा.

ब्रिटेन की एक अदालत ने इसी दिन 1987 में मानहानि के एक मुक़दमे में जानेमाने उपन्यासकार और कन्ज़रवेटिव पार्टी के पूर्व उपाध्यक्ष जेफ़री आर्चर के पक्ष में फ़ैसला सुनाया था.

अदालत ने द डेली स्टार अख़बार को आदेश दिया था कि वे याचिकाकर्ता सांसद आर्चर को पांच लाख पाउंड का हर्जाना दें, साथ ही लगभग सात लाख पाउंड ख़र्च की भी भरपाई करें.

दरअसल अख़बार ने उसके पिछले साल यानि 1986 के नवंबर में पहले पन्ने पर एक ख़बर छापी थी जिसमें कहा गया था कि जेफ़री आर्चर ने एक यौनकर्मी के साथ संभोग करने के लिए उसे पैसे दिए थे.

अख़बार में छपी ख़बर के मुताबिक़ जेफ़री आर्चर ने मोनिका कॉगलन नाम की एक यौनकर्मी को संभोग करने के लिए 50 पाउंड और अतिरिक्त समय के लिए और 20 पाउंड दिए थे.

इस ख़बर के छपने के बाद जेफ़री आर्चर को कंज़र्वेटिव पार्टी के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था. लेकिन आर्चर ने अख़बार के ख़िलाफ़ मानहानि का मुक़दमा किया था और लगभग 12 लाख पाउंड हर्जाने की रक़म मिली. उस वक़्त तक हर्जाने के रूप में दी जाने वाली चौथी सबसे बडी रक़म थी.

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