संविधान नहीं कुरान

  • 24 जुलाई 2011
मलेशिया इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption साल 2010 तीन महिलाओं को विवाहेतर संबंधों के लिए कोड़े लगाये गए थे

मलेशिया में हुए एक नए सर्वेक्षण में पता लगा है कि देश के ज़्यादातर युवा अपने संविधान की जगह कुरान को देश चलाने का जरिया बनाना चाहते हैं.

एक स्वतंत्र मत सर्वेक्षण कंपनी मर्डेका सेंटर द्वारा किए गए इस सर्वे से पता लगा है कि पूर्वी एशिया का यह देश तेज़ी के साथ सामाजिक रूप से कट्टरपंथी होता जा रहा है. ये नया सर्वेक्षण उन सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए चिंता का विषय है जो लंबे समय से चेताते रहे हैं कि देश का इस्लामीकरण होता जा रहा है. इस सर्वेक्षण में यह भी पता लगा है कि ज़्यादातर युवा अपराधियों के लिए अधिक कड़ी सजाएं चाहते हैं. दस में से सात लोगों का कहना है कि चोरों के हाथ काट देने चाहिए. अधिकतर मानते हैं कि शराब पीने पर कोड़े लगाए जाना सही होगा. इस सर्वेक्षण में एक अनोखी बात जो सामने आई है कि मलेशिया के ये मुसलमान धार्मिक परंपराओं का पालन करने में उतने सख्त नहीं हैं.

सर्वेक्षण में क़रीब 70 प्रतिशत लोगों का कहना है कि वो नमाज़ पढ़ने के लिए मस्जिद जाने की अपेक्षा घर पर टीवी देखना अधिक पसंद करते हैं. रिजवान रज़ाली जैसे युवाओं को इसमें कहीं विरोधाभास नहीं दिखता. रज़ाली कहते हैं " आप हमसे पूरे समय प्रार्थना की अपेक्षा नहीं कर सकते. एक अच्छा मुसलमान होने का मतलब है कि अपने जीवन को अच्छे से जिया जाये और जीवन की आम चीज़ों से आनंद उठाया जाए." सर्वेक्षणकर्ताओं ने 25 साल से कम उम्र के क़रीब 1000 मुसलमान युवाओं से बात की. हालाँकि सर्वेक्षण में कम लोगों से बात की गई है पर ये उन लोगों की बातों की पुष्टि कर रहा है जो यह कहते हैं कि देश के मुसलमान तेज़ी से कट्टरपंथी होते जा रहे हैं. पिछले कुछ समय में कई चर्चित घटनाएं घटी हैं जिनसे मलेशिया की एक नरमपंथी मुसलमान राष्ट्र की छवि को धक्का लगा है. साल 2010 में तीन ऐसी महिलाओं को कोड़े लगाए गए थे जिन्हें अपने वैवाहिक संबंधों के बाहर शारीरिक संबंध बनाए का दोषी पाया गया था. यूँ तो मलेशिया में शरियत के कानून केवल मुसलामानों पर लागू होते हैं पर शायद ही किसी को विवाहेतर संबंधों या शराब पीने के लिए दण्डित किया गया हो. पर हालात बदल रहे हैं. कई समाजशास्त्री कहते हैं की इस्लामी कट्टरपंथी तेज़ी के साथ निजी गलतियों और पापों को अपराध की तरह से देख रहे हैं.

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