'नॉर्वे हमलावर' के और साथी थे

  • 25 जुलाई 2011
एंडर्स बेरिंग ब्रेविक इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption एंडर्स बेरिंग ब्रेविक को चार हफ़्ते के लिए एकांत में रखा जाएगा

नॉर्वे में शुक्रवार को 76 लोगों की हत्या करने के आरोप में गिरफ़्तार युवक ने अदालत को बताया है कि उसके और भी साथी थे.

एंडर्स बेरिंग ब्रेविक ने ओस्लो की अदालत में सुनवाई के दौरान कहा कि उसका एक संगठन था जिसकी दो और शाखाएँ थीं.

मीडिया को इस सुनवाई से इस चिंता के कारण बाहर रखा गया था कि कहीं अभियुक्त इसे राजनीतिक मंच की तरह इस्तेमाल ना करने लगे.

इस बीच पुलिस ने मरने वालों की संख्या 76 बताई है. इनमें से 68 लोग गोलीबारी में और आठ लोग विस्फोट में मारे गए.

मामले की सुनवाई कर रहे जज ने कहा है कि अभियुक्त ने हमले करने की बात स्वीकार कर ली है लेकिन उसने ख़ुद को दोषी मानने से इनकार कर दिया है.

जज ने बताया कि अभियुक्त ने दलील दी है कि यूरोप को मुसलमानों के नियंत्रण और सांस्कृतिक मार्क्सवाद से बचाने के लिए ये हत्याएँ आवश्यक थीं.

जज ने बताया कि एंडर्स बेरिंग ब्रेविक के ऊपर आतंकवाद का अभियोग लगाया गया है और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.

जज ने अभियुक्त की खुली सुनवाई की माँग को ठुकरा दिया है, एंडर्स ने कहा था कि उनके मुकदमे की सुनवाई आम जनता के सामने होनी चाहिए लेकिन सरकारी वकील ने कहा था कि ऐसा होने पर एंडर्स को अपने चरमपंथी विचारों का प्रचार करने का अवसर मिलेगा.

अभियुक्त के वकील ने कहा है कि उनके मुवक्किल की राय में "यह हत्याकांड जघन्य तो है लेकिन आवश्यक था", अभियुक्त ने माना है कि वह लंबे समय से इस हमले की तैयारी कर रहा था.

नॉर्वे में आज मृतकों की स्मृति में ओस्लो कैथेड्रल में हज़ारों लोग जमा हुए जिन्होंने प्रार्थना सभाओं में हिस्सा लिया.

स्थानीय समय के अनुसार दोपहर बारह बजे बारिश के बीच ग़मगीन लोगों ने जब एक मिनट का मौन रखा.

ब्रेविक ने न केवल नार्वे की राजधानी ओस्लो में कार बम धमाका किया था बल्कि इस धमाके के बाद वो ओस्लो से थोड़ी दूर एक द्वीप पर गए जहां उन्होंने अंधाधुंध गोलियां चलाकर 76 लोगों को मार डाला.

नॉर्वे में अब भी मृतकों की पहचान और उनके अंतिम संस्कार की तैयारियाँ चल रही हैं.

'ग़ममीन है माहौल'

इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption एंडर्स बहुसंस्कृतिवाद की नीतियों से नाराज़ थे

नॉर्वे की संसद के उप सभापति अख्तर चौधरी ने बीबीसी हिंदी सेवा से एक विशेष बातचीत में कहा कि "द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अब तक की देश की सबसे बड़ी त्रासदी ने सबको हिलाकर रख दिया है".

उन्होंने कहा कि देश में इस समय दुख का माहौल है और लोग गहरे सदमे में हैं लेकिन चरमपंथी दक्षिणपंथ पर राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है जो आने वाले दिनों में ज़ोर पकड़ेगी.

पाकिस्तानी मूल के अख़्तर चौधरी वामपंथी सोशलिस्ट पार्टी के नेता हैं और उनका कहना है कि "नए सिरे से यह बहस छिड़ेगी कि इस देश में ऐसे लोग कितने हैं, कहाँ हैं और कितने मज़बूत हैं जो इस तरह के चरमपंथी हमले कर सकते हैं, अब तक हम यही समझ रहे थे कि देश में अति-दक्षिणपंथी हिंसक तत्वों को ख़त्म कर दिया गया है या नियंत्रित कर लिया गया है लेकिन हम शायद ग़लत थे."

चौधरी ने कहा, "हमारे देश में इस्लामी चरमपंथ पर बहुत खुलकर बहस हुई है, अब मुझे लगता है कि दक्षिणपंथी चरमपंथ पर भी उसी तरह खुलकर बहस होगी."

नॉर्वे में विदेशी मूल के अल्पसंख्यक लोगों की संख्या लगभग 13 प्रतिशत है जिसमें दक्षिण एशियाई मूल के लोग काफ़ी अधिक हैं, ख़ास तौर पर इस्लाम को मानने वाले पाकिस्तानी मूल के लोग.

इस हत्याकांड के बाद नॉर्वे के प्रधानमंत्री ने कहा है कि यह देश की बहुसांस्कृतिक संरचना को दी गई एक चुनौती है और नॉर्वे अपनी उदार लोकतांत्रिक व्यवस्था को बदलेगा नहीं बल्कि उसे और मज़बूत करेगा.

संबंधित समाचार