इतिहास के पन्नों से...

इतिहास के पन्ने पलटें तो 28 जुलाई का दिन कई वजहों से याद किया जाएगा. वर्ष 1976 में इसी दिन चीन में भूकंप आने से लाखों लोगों की मौत हो गई और वर्ष 2005 में इसी दिन आईआरए ने घोषणा की कि वे अपना सशस्त्र अभियान ख़त्म कर रहे हैं.

1976: चीन में भूकंप से लाखों की मौत

Image caption भूकंप के बाद चीनी अधिकारी लंबे समय तक इसकी पूरी जानकारी देने से कतराते रहे.

चीन में 28 जुलाई 1976 को रिक्टर पैमाने पर 8.3 की तीव्रता का भूकंप आने से लाखों लोगों की मौत हो गई थी.

भूकंप से राजधानी बीजिंग के उत्तर-पूर्व में स्थित शहर तांगशान तहस-नहस हो गया.

शहर के सबसे बड़े अस्पताल की इमारत ढह गई जिसमें उस वक़्त क़रीब 2,000 लोगों के मौजूद होने का अनुमान था.

ख़बरों के मुताबिक भूकंप इतना ज़ोरदार था कि सड़कें, पुल, रेलवे स्टेशन, घर और फैक्ट्रियां तबाह हो गईं.

भूकंप तड़के क़रीब पौने चार बजे आया और 14 से 16 सेकेंड के लिए महसूस किया गया.

चीन द्वारा जारी की गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक मरने वालों की संख्या क़रीब ढाई लाख थी.

तांगशान शहर के पुनर्निर्माण का काम जल्द शुरू किया गया था और धीरे-धीरे पूरे शहर को नए तरीके से बनाया गया.

अब तांगशान को 'चीन के साहसी शहर' के नाम से जाना जाता है.

2005: आईआरए ने सशस्त्र अभियान रोका

Image caption आईआरए ने कई सालों के हिंसक अभियान के बाद हथियार डालने की घोषणा की थी.

28 जुलाई 2005 को आइरिश रिपब्लिकन आर्मी यानि आईआरए ने आधिकारिक तौर पर अपने सशस्त्र अभियान को रोकने की घोषणा की.

एक बयान जारी कर आईआरए ने कहा कि वो अब लोकतांत्रिक तरीके से काम करेगी.

इस बयान में कहा गया था, "आईआरए की सभी इकाइयों को हथियार छोड़ देने का आदेश दिया गया है. सभी स्वयं सेवकों को निर्देश दिया गया है कि विशुद्ध रूप से राजनीतिक और लोकतांत्रिक कार्यक्रम बनाएँ और इनके लिए शांतिपूर्ण तरीक़े इस्तेमाल करें."

आईआरए के हिंसक अभियान का लक्ष्य था - उत्तरी आयरलैंड में ब्रितानी मौजूदगी समाप्त करके एक संयुक्त आयरलैंड की स्थापना करना.

एक अनुमान के मुताबिक आईआरए के 30 वर्षों की हिसंक गतिविधियों के दौरान क़रीब 1800 लोगों को मारा गया था.

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