सहायक सशस्त्र बल के गठन का रास्ता साफ़

  • 29 जुलाई 2011
रमन सिंह
Image caption रमन सिंह ने माओवादियों से सख्ती से निपटने की बात दोहराई है.

छत्तीसगढ़ में 18 साल से लेकर 45 साल तक के पुरूष और महिला सहायक सशस्त्र बल का हिस्सा बन सकेंगे.

इस आशय के एक विधेयक को रमन सिंह के मंत्रीमंडल नें सहमति प्रदान कर दी है.

अब आगामी विधान सभा के सत्र के दौरान छत्तीसगढ़ सहायक सशस्त्र बल विधेयक-2011 सदन के पटल पर रखा जाएगा जहाँ इसे सरकार पारित कराने की कोशिश करेगी.

समझा जा रहा है कि इस विधेयक के पारित हो जाने से राज्य में नक्सल विरोधी अभियान में लगे विशेष पुलिस अधिकारी यानी एसपीओ का सुरक्षा बल में समायोजन संभव हो पाएगा.

मंत्रिमंडल नें इससे पहले बस्तर के इलाके के लोगों को पुलिस बल में भर्ती के लिए शारीरिक और शैक्षणिक योग्यता में भी ढील देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी थी.

हर ज़िले में तैनाती

सहायक सशस्त्र बल का गठन राज्य के हर ज़िले में किया जाएगा.

जहाँ इसमें शैक्षणिक योग्यता की सीमा सिर्फ पांचवीं क्लास रखी गई है वहीं इसमें 18 से लेकर 45 साल तक के लोगों को भर्ती किया जाएगा.

इनकी सेवा शर्तें, प्रशिक्षण और भर्ती की प्रक्रिया भी तय कर दी गई है.

सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि इस बल के गठन से नक्सल विरोधी अभियान को बल मिलेगा.

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ में विशेष पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति और उन्हें हथियार दिए जाने पर सवाल उठाते हुए इसे असंवैधानिक करार दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने न केवल एसपीओ की नियुक्ति को असंवैधानिक बताया है बल्कि सलवा जुड़ूम को बंद करने का भी निर्देश दिया था.

छत्तीसगढ़ सरकार का कहना था कि इस फ़ैसले से राज्य में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान को बड़ा झटका लगा है क्योंकि एसपीओ स्थानीय युवक हैं जो नक्सल हिंसा के पीड़ित भी हैं.

पुलिस मुख्यालय को उम्मीद है कि नए अध्यादेश से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बेरोजगार हुए पांच हज़ार से ज्यादा एसपीओ का भी समायोजन संभव हो पाएगा.

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