अमरीका का कर्ज़ संकटः सवाल जवाब

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Image caption अमरीका कर्ज़ संकट के दौर से गुज़र रहा है

अमरीका में जारी ऋण संकट पर डेमोक्रेट और रिपब्लिकन सांसदों के बीच वार्ताएं तो हो रही हैं लेकिन किसी भी प्रकार की आम सहमति नहीं हो सकी है.

अगर दो अगस्त तक अमरीकी संसद कर्ज़ लेने की सीमा नहीं बढ़ाती, तो संभावना है कि अमरीका अपने ख़र्चों का भुगतान ही न कर पाए.

कर्ज़ लेने की सीमा क्या है ?

अमरीका की सरकार एक निश्चित सीमा तक ही कर्ज़ लेने के क़ानूनी प्रावधान से बँधी हुई है.

इससे प्राप्त धन से ही सरकार अपने नियमित ख़र्चों का भुगतान करती है. इनमें सेना की तनख्वाह, वर्तमान कर्ज़ पर ब्याज़ की रकम और स्वास्थ्य सुविधाओं पर होने वाला ख़र्च भी शामिल है.

इस समय अमरीका की कर्ज़ लेने की सीमा 14.3 अरब डॉलर है. और ये मई में ही ख़त्म हो चुकी है

वित्त मंत्री टिमोथी गीथनर ने दो अगस्त तक की समयसीमा को बढ़ाने के लिए सरकारी पेंशन योजनाओं के लिए किए जाने वाले भुगतान को आगे बढ़ाने जैसे चतुराई भरे क़दमों का सहारा लिया.

रिपब्लिकन और कुछ विश्लेषकों का मानना है कि दो अगस्त के बाद भी सरकार कुछ दिन और ख़र्च चला सकती है

ओबामा प्रशासन और उधार क्यों नहीं ले सकता ?

ये उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है. सभी सरकारी कर्ज़ों को अमरीकी संविधान के तहत संसद से मंज़ूरी लेनी पड़ती है.

कर्ज़ लेने की सीमा पहली बार 1917 में शुरू की गई थी ताकि सरकार प्रथम विश्व युद्ध के दौरान अपने ख़र्च चला सके.

उसके बाद से ये सीमा कई बार बढ़ाई जा चुकी है. आम तौर पर ये मात्र एक औपचारिकता भर ही होती है.

इससे पहले कांग्रेस सरकार के ख़र्चों और टैक्स को तय करती रही है.

ओबामा प्रशासन एक ऐसी असहज स्थिति का सामना कर रहा है जिसमें उसके ख़र्चे उपलब्ध आमदनी से कहीं ज़्यादा हैं.

इस बार दिक्कत क्या हैं?

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Image caption वित्त मंत्री टिमोथी गीथनर का कहना है कि अगर सहमति न हुई तो इसके विनाशकारी परिणाम होंगे.

वित्तीय संकट और अमरीका की दुर्बल अर्थव्यवस्था की वजह से सरकार के ख़र्चों में तो वृद्धि हुई, जबकि टैक्स से मिलने वाला राजस्व बुरी तरह प्रभावित हुआ.

इसकी वजह से सरकार का घाटा बढ़ गया.

प्रतिनिधि सभा पर प्रभुत्व रखने वाले रिपब्लिकन सांसदों का कहना है कि वो चाहते हैं कि वित्तीय घाटे पर काबू पाया जाए.

दोनों पक्ष किस तरह एक दूसरे से अलग हैं ?

दोनो ही मानते हैं कि घाटे में कमी करना ज़रूरी है, लेकिन दोनों पार्टियों की आर्थिक नीतियां अलग हैं. सीनेटरों के एक ग्रुप ने ख़र्चों में कटौती और टैक्स बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था.

जहाँ रिपब्लिकन सांसद ख़र्च में और अधिक कटौती की मांग कर रहे हैं, वहीं डेमोक्रेट चाहते हैं कि ख़र्चों में कटौती न हो बल्कि कॉरपोरेट सेक्टर पर अधिक टैक्स लगाकर ऋण संकट से उबरने का रास्ता निकाला जाए.

रिपब्लिकन चाहते हैं कि सरकार टैक्स में कोई बढ़ोत्तरी न करे जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी का मानना है कि ग़रीबों, बूढ़ों और अन्य लोगों के पेंशन योजना के लिए पैसा टैक्स बढ़ोतरी से हासिल किया जाए.

सत्तारुढ़ दल और विपक्ष के बीच बातचीत के कई दौर हो चुके हैं कोई नतीजा नहीं निकल पाया है.

अमरीकी संसद में विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी के नेता जॉन बोहेनर ने घोषणा की कि वो इस बातचीत से ख़ुद को अलग कर रहे हैं.

अगर दो अगस्त तक दोनों पक्षों में सहमति न हुई तो ?

दो अगस्त की समय सीमा तक अगर अमरीका अपने कर्ज़ का भुगतान नहीं किया तो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमरीका की साख पर विपरीत प्रभाव पडे़गा.

वित्त मंत्री टिमोथी गीथनर का कहना है कि इसके विनाशकारी परिणाम होंगे.

राष्ट्रपति ओबामा ने अमरीका में फिर से मंदी की चेतावनी दी है.

अमरीका अपने सभी कर्ज़ों औऱ ब्याज़ की रक़म का भुगतान नहीं कर पाएगा. इससे ना सिर्फ़ वित्तीय बाज़ारों पर असर पड़ेगा बल्कि सरकार को अपने ख़र्चे के लिए भी धन जुटाना मुश्किल हो जाएगा.

विशेषज्ञों की राय

जॉर्ज वाशिंगटन विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर जूलियस हॉबसन का कहना है कि इससे क्रेडिट कार्ड, कार लोन और मकान के लिए मिलने वाले ऋण की दरें तेज़ी से बढ़ेंगी.

हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर जैफ्री मिरॉन का कहना है कि इससे विदेशी कर्ज़दाता अमरीकी बैंकों से अपना पैसा वापस निकालने लगेंगे.

साथ ही सामाजिक सुरक्षा की योजनाओं में भी देरी से भुगतान होगा.

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