भारत सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष बना

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भारत ने 19 साल के अंतराल के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता संभाली है. भारत अगस्त महीने के लिए सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष है.

ये बागडोर विभिन्न देशों के बीच बदलती रहती है. भारत सुरक्षा परिषद का अस्थाई सदस्य है और आख़िरी बार ये ज़िम्मेदारी उसे दिसंबर 1992 मे मिली थी.

माना जा रहा है कि भारत अपनी नई भूमिका का इस्तेमाल स्थाई सदस्यता के लिए अपनी दावेदारी मज़बूत करने के लिए करेगा.

अगस्त महीने में संयुक्त राष्ट्र में आमतौर पर छुट्टियाँ हैं. पीटीआई के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र में भारत के दूत हरदीप पुरी का कहना है कि भारत राजनीतिक परिपक्वता के साथ अपनी ज़िम्मेदारी निभाएगा.

उन्होंने कहा, “हम इस अवसर का इस्तेमाल न सिर्फ़ अपनी साख स्थापित करने में करेंगे बल्कि ये भी देखेंगे कि विश्व में स्थाई शांति कैसे कायम की जा सके.”

सुरक्षा परिषद के रोज़मर्रा के काम के अलावा भारत शांतिबलों पर एक चर्चा भी आयोजित कराएगा.भारतीय दूत ने कहा है कि सूडान और लीबिया पर अंतरराष्ट्रीय जगत को ध्यान देने की ज़रूरत है.

सीरिया पर मतभेद

उधर सीरिया में प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ सरकार के बल प्रयोग पर जर्मनी ने औपचारिक रुप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाने का आह्ववान किया है.

सुरक्षा परिषद में अब भी इस बात को लेकर मतभेद हैं कि सीरिया में हो रही हिंसा से किस तरह निपटना चाहिए. अभी तक सुरक्षा परिषद ने इस मामले में एक बयान पर भी राज़ी नहीं हो सका है.अध्यक्ष देश परिषद में होने वाली बहस का एजेंडा तय करता है.

पिछले कुछ समय से ब्रिटेन और फ्रांस समेत कई यूरोपीय देश सीरिया के मुद्दे पर किसी तरह की कार्रवाई या कम से कम इसकी सार्वजनिक निंदा की बात कर रहे हैं.

भारत उन देशों में है जो सीरिया के ख़िलाफ़ किसी मसौदे का समर्थन नहीं कर रहा है. इसके अलावा रुस और चीन ने भी सीरिया की सरकार के ख़िलाफ़ किसी प्रस्ताव को वीटो करने की बात कह दी है.

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