मलेशिया में अवैध प्रवासियों को माफ़ी?

इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption मलेशिया में बड़ी संख्या मे बांग्लादेश और इंडोनेशिया के मज़दूर काम करते हैं.

मलेशिया ने अवैध प्रवासियों के लिए अब तक के सबसे बड़े माफ़ी के कार्यक्रम के तहत इस हफ्ते उनके फिंगरप्रिंट्स जमा करना शुरु कर दिया है.

मलेशिया में प्रति वर्ष हज़ारों की संख्या में प्रवासी अच्छी नौकरियों और पैसे की तलाश में अवैध रुप से आते हैं.

मलेशिया सरकार ने घोषणा की है कि सभी अवैध रुप से रह रहे प्रवासी बिना किसी भय के रजिस्ट्रेशन कराएं.

हालांकि मानवाधिकार गुटों का कहना है कि अवैध रुप से रह रहे मज़दूरों को धोखा दिया जा रहा है और कार्यक्रम के उद्देश्य स्पष्ट नहीं है.

रजिस्ट्रेशन

इस कार्यक्रम के तहत प्रवासी मज़दूरों को अगले छह महीने में अपने फिंगरप्रिंट रजिस्टर करवाने हैं जिससे वो मलेशिया में वैध रुप से रह सकेंगे और काम कर सकेंगे.

अभी साफ नहीं है कि रजिस्ट्रेशन के बाद किन्हें मलेशिया में रहने की अनुमति मिलेगी और किसे वापस भेजने की प्रक्रिया शुरु की जाएगी.

ऐसा इसलिए है क्योंकि क्षमादान कार्यक्रम में यह नहीं कहा गया है कि अपने बारे में जानकारी देने वाले सभी लोगों को क्षमादान मिल जाएगा.

अधिकारियों का कहना है कि फिंगप्रिंट्स लेने की कवायद अपराध रोकने की भी कोशिश है क्योंकि बड़ी संख्या में प्रवासी आपराधिक गतिविधियों में भी संलिप्त रहते हैं.

इस कार्यक्रम से जुड़े एक अधिकारी एलियास अहमद ने पूरी प्रक्रिया को विशालकाय और पेचीदगियों भरा बताया है लेकिन उनका कहना था कि बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंटिंग से सरकार को प्रवासी मज़दूरों पर नज़र रखने में मदद मिलेगी.

सरकार की कोशिश होगी कि मज़दूरों का शोषण रोका जा सके.

फिंगरप्रिंटिंग प्रक्रिया के शुरु होते ही इसमें तकनीकी समस्याओं की शिकायतें आने लगी हैं. इतना ही नहीं कई प्राइवेट एजेंटों द्वारा विदेशी मज़दूरों से पैसा लेने और धोखा देने की बात भी सामने आई है.

मलेशिया में अधिकतर प्रवासी मज़दूर भारत, बांग्लादेश और इंडोनेशिया से आते हैं जो कम मज़दूरी वाले काम करते हैं क्योंकि मलेशियाई लोग कम मज़दूरी वाले कामों में रुचि नहीं रखते हैं.

संबंधित समाचार