जवाबी कार्रवाई करेगा अमरीका?

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Image caption पाकिस्तान में अमरीका के ख़िलाफ़ माहौल गहराया है.

पाकिस्तान में अपने कूटनयिकों की यात्राओं पर लगे प्रतिबंध को हटाने के लिए अमरीका पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ बातचीत कर रहा है.

अमरीका ने कहा है कि वो पाकिस्तान के अधिकारियों के साथ बातचीत कर रहा है ताकि उसके कूटनयिकों की यात्रों पर लगी पाबंदियों को हटाया जा सके.

पिछले हफ़्ते पाकिस्तान ने अमरीकी कूटनयिकों को इस्लामाबाद और पेशावर के बीच यात्रा करने से रोक दिया था.

ये जानकारी अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मार्क टोनर ने दी. उन्होंने जवाबी कार्रवाई के तौर पर अमरीका में पाकिस्तानी कूटनयिकों पर इसी तरह की पाबंदियाँ लगाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया.

संबंधों में कड़वाहट

पिछले दिनों अमरीका और पाकिस्तान के संबंधों में काफ़ी कड़वाहट आई है.

मई के महीने में अमरीकी सैनिकों ने पाकिस्तान के अंदर घुसकर ऐबटाबाद में छिपे ओसामा बिन लादेन को मार डाला था. इस घटना से पाकिस्तान में बहुत सारे लोगों में ग़ुस्सा फैल गया था.

अमरीका में सवाल पूछे जाने लगे थे कि क्या पाकिस्तान के अधिकारियों को अल-क़ायदा नेता ओसामा बिन लादेन के छिपे होने की जानकारी थी.

ओसामा के मारे जाने के बाद पाकिस्तान में बहुत से लोगों को गिरफ़्तार कर लिया गया है. उन पर आरोप है कि वो अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी के मददगार थे.

पिछले महीने अमरीका में एक कश्मीरी व्यक्ति ग़ुलाम नबी फ़ई को गिरफ़्तार कर लिया गया था.

फ़ई यूँ तो अमरीकी नागरिक हैं पर उन पर पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के लिए काम करने का आरोप है.

अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मार्क टोनर ने कहा, "मैं समझता हूँ पिछले हफ़्ते कूटनयिकों को इस्लामाबाद और पेशावर के बीच यात्रा करने से रोका गया था. हमने अपनी चिंताएँ व्यक्त कर दी हैं और हमें लगता है कि इस विवाद को सुलझाने की दिशा में हम आगे बढ़े हैं."

जवाबी कार्रवाई?

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Image caption पाकिस्तान और अमरीका के संबंधों में काफ़ी कड़वाहट आई है.

टोनर ने कहा सरकार से इजाज़त मिलने के बाद कूटनयिकों ने इस्लामाबाद और पेशावर के बीच यात्रा की थी.

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में अमरीका के राजदूत कैमरन मंटर से भी कराची के लिए हवाई यात्रा शुरू करने से पहले सरकारी प्रमाणपत्र दिखाने को कहा गया था.

मंटर के पास ऐसा प्रमाण पत्र नहीं था लेकिन उन्हें यात्रा की अनुमति दे दी गई.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि इस तरह की कार्रवाइयों का जवाब देने पर हमेशा विचार किया जा सकता है.

तालिबान और अल-क़ायदा से युद्ध में पाकिस्तान एक अर्से से अमरीका की मदद कर रहा है.

लेकिन एक दूसरे के ख़िलाफ़ बदले की कार्रवाई पिछले कुछ महीने से ही हो रही है और दोनों देशों के संबंध काफ़ी तनावपूर्ण हो चुके हैं.

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