ऋण संबंधी बिल को मिला क़ानूनी जामा

  • 2 अगस्त 2011
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अमरीका में सीनेट ने कर्ज़ लेने की सीमा बढ़ाने संबंधी प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है. जबकि प्रतिनिधि सभा ने सोमवार को ही इसे स्वीकृति दे दी थी.

सीनेट में बिल के पक्ष में 74 वोट पड़े और विरोध में 26. अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने बिल को मंज़ूरी मिलने का स्वागत किया है.

अमरीका को दो अगस्त तक कर्ज़ लेने की अपनी 14 खरब डॉलर की सीमा को बढ़ाना था वरना इस बात का डर था कि वो ऋण की अदाएगी में चूक जाएगा.

दोनों मुख्य पार्टियाँ डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन के बीच रविवार देर रात को इस प्रस्ताव पर समझौता हुआ था कि कर्ज़ लेने की 14.3 ट्रिलियन डॉलर की सीमा में 2.4 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ोतरी की जाए.

लेकिन इसके बदले में 10 सालों में कम से कम 2.1 ट्रिलियन डॉलर की बचत करनी होगी और कोई नए कर भी नहीं लगाए जाएँगे. ये सहमति बनाने में दोनों पार्टियों के कई महीने लग गए.

अमरीकी कर्ज़ बहुत बड़ा संकट था जिसे लेकर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं और वैश्विक बाज़ारों में भारी चिंता थी.

कहाँ खड़े हैं ओबामा

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क़र्ज़ लेने की सीमा न बढ़ाए जाने का मतलब था अमरीका के लिए पैसे से संबंधित छोटे-छोटे काम का कर पाना मुश्किल हो जाता जिसका असर ज़ाहिर है दूसरी अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ता. अमरीका दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था है.

दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की क़र्ज़ अदाएगी न कर पाने का असर ऋण दरों पर पड़ने की बात कही जा रही थी, जो ऊपर चली जाती, जिसका असर अमरीका अर्थव्यवस्था पर पड़ता और फिर वैश्विक मंदी से उबरने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता था.

राष्ट्रपति ओबामा के लिए अहम बात ये है कि इस बिल के ज़रिए ऋण लेने की सीमा 2013 तक के लिए ही बढ़ाई गई है यानी जब अगले साल वो दोबारा राष्ट्रपति बनने के अभियान की तैयारी में होंगे उस दौरान ये मुद्दा कांग्रेस में फिर से उठेगा.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ये एक ऐसा समझौता है जिससे कोई भी पार्टी पूरी तरह ख़ुश नहीं है. रिपब्लिकन पार्टी के कई सदस्य ज़रूर ये मान रहे हैं कि उन्होंने अपनी बात मनवा ली कि भविष्य में करों में बढ़ोतरी नहीं होगी और खर्च में कटौती की जाएगी. लेकिन डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टियों के बीच हुई सहमति से दोनों पार्टियों के राइटविंग सदस्य नाराज़ हैं.

वहीं बराक ओबामा को भी अर्थव्यवस्था के लिए नया रास्ता अख़्तियार करना पड़ रहा है और कटौती पर सहमत होना पड़ा है.

बीबीसी संवाददाता के मुताबिक ओबामा की ऐसी छवि भले लग सकती है जिन्होंने एक बड़े संकट को टाल दिया लेकिन वे हाशिए पर खड़े ऐसे व्यक्ति भी नज़र आ रहे हैं जो अपनी ही नीतियों को लागू नहीं करवा पा रहे.

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