अमरीकी क़र्ज़ सीमा बढ़ाने के बिल को मिली मंज़ूरी

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अमरीका में प्रतिनिधि सभा ने कर्ज़ लेने की सीमा बढ़ाने संबंधी प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है. बिल के पक्ष में 269 और विरोध में 161 मत पड़े. अब ये प्रस्ताव सिनेट में जाएगा.

अमरीका को कर्ज़ लेने की अपनी 14 खरब डॉलर की सीमा को बढ़ाना है वरना इस बात का डर है कि वो ऋण की अदाएगी में चूक जाएगा.

अमरीका के कर्ज़ लेने की सीमा बढ़ाने की डेडलाइन स्थानीय समयानुसार मंगलवार को ख़त्म होनी है. और ये मतदान उससे कुछ समय पहले हो रहा है.

दोनों मुख्य पार्टियाँ डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन के बीच रविवार देर रात को इस प्रस्ताव पर समझौता हुआ था कि कर्ज़ लेने की 14.3 ट्रिलियन डॉलर की सीमा में 2.4 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ोतरी की जाए.

इस प्रस्ताव को क़ानून बनाने के लिए कांग्रेस के दोनों सदनों की मंज़ूरी मिलना ज़रूरी है. प्रतिनिधि सभा में कुल 435 सदस्य हैं जिसमें से रिपब्लिकन के पास 240 सीटे हैं जो उसे स्पष्ट बहुमत दिलाती हैं.

नकारात्मक असर

दोनों पार्टियाँ पिछले कई दिनों से कर्ज़ बढ़ाने की सीमा और खर्च घटाने को लेकर बहस कर रहे थीं लेकिन कोई सहमति नहीं बन पा रही थी.

प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी का कब्ज़ा है और सिनेट पर डेमोक्रेटिक पार्टी का. लेकिन दोनों पार्टियाँ एक दूसरे के प्रस्तावों को ठुकराते जा रही थीं. दोनों के बीच समझौते के बाद चीन ने ख़ुशी जताई है.

अमरीकी कर्ज़ बहुत बड़ा संकट था जिसे लेकर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं और वैश्विक बाज़ारों में भारी चिंता थी.

क़र्ज़ लेने की सीमा न बढ़ाए जाने का मतलब था अमरीका के लिए पैसे से संबंधित छोटे-छोटे काम का कर पाना मुश्किल हो जाता जिसका असर ज़ाहिर है दूसरी अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ता. अमरीका दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था है.

दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की क़र्ज़ अदाएगी न कर पाने का असर ऋण दरों पर पड़ने की बात कही जा रही थी, जो ऊपर चली जाती, जिसका असर अमरीका अर्थव्यवस्था पर पड़ता और फिर वैश्विक मंदी से उबरने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता था.

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