मुबारक का सभी आरोपों से इनकार

  • 3 अगस्त 2011
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मिस्र के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक़ और उनके दोनों बेटों ने काहिरा में शुरू हुए मुक़दमे के पहले दिन अपने पर लगे सभी आरोपों से इनकार किया.

उन लोगों पर भ्रष्टाचार, मुनाफ़ाख़ोरी और हज़ारों प्रदर्शनकारियों की हत्या का आदेश देने संबंधी आरोप लगे हैं.

उन्हें अस्पताल के बिस्तर पर ही कोर्ट में लाया गया और वहाँ पर एक कटघरे में वो बिस्तर लगाया गया है. वहाँ मौजूद लोग आश्चर्य से उन्हें देख रहे थे.

मुबारक लगभग 30 साल तक मिस्र के राष्ट्रपति रहे थे और उनकी उम्र लगभग 82 साल है.

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अपने कटघरे में बिस्तर के ऊपर लेटे मुबारक पूरी कारवाई को शांति से देख रहे थे. सलाखों के पीछे अपने बिस्तर पर लेटे होस्नी मुबारक के बगल के उसी तरह के कठघरे में उनके दोनों बेटे और पूर्व आतंरिक सुरक्षा मंत्री बंद थे

कोर्ट की कार्यवाही स्थगित कर दी गई है. उधर मारे गए लोगों के परिजनों ने मिस्र के मौजूदा सैन्य प्रमुख फ़ील्ड मार्शल मोहम्मद तंतावी और आंतरिक मामलों के मंत्री जनरल मंसूर अल-असावी को गवाह के तौर पर बुलाने की माँग की है.

मुबारक के आलावा उनके बेटे अला और जमाल, पूर्व आतंरिक सुरक्षा मंत्री हबीब अल अदली तथा छह पूर्व अधिकारियों भी अदालत के सामने थे. अल अदली को काला बाज़ारी के लिए पहले ही मई में एक अन्य मुक़दमे में 12 साल की सज़ा सुनाई जा चुकी है.

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Image caption मिस्र में बहुत से लोगों को सैन्य परिषद की नीयत पर शक़ है

क़रीब 3000 सैनिकों और पुलिस वालों की मौजूदगी में बुधवार को यह कार्रवाई काहिरा की पुलिस अकादमी में शुरु हुई.

कड़ी सुरक्षा के बीच कार्यवाही

कड़ी सुरक्षा के बीच शुरु होने वाली इस कार्यवाही से पहले सुरक्षा बलों ने तहरीर चौक में हवा में फ़ायरिंग की. ऐसा वहाँ मौजूद कुछ प्रदर्शनकारियों को भगाने के लिए किया गया. मुक़दमे के दौरान सैकड़ों लोग इस विशेष अदालत में मौजूद थे.

पुलिस अकादमी में जिन लोगों पर अभियोग चलाया जाना है उन लोगों के लिए एक नया कठघरा बनाया गया. पहले यह सुनवाई काहिरा के कन्वेंशन सेंटर में होनी थी लेकिन बाद में सुरक्षा कारणों से इसे पुलिस अकादमी में करने का फ़ैसला लिया गया.

मुबारक अप्रैल से शर्म अल शेख़ में एक अस्पताल में नज़रबंद थे. मुबारक को कार्यवाही शुरु से ठीक पहले काहिरा लाया गया.

मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति ने फ़रवरी 11 को काहिरा के तहरीर चौक पर अपने खिलाफ़ 18 दिन तक चले प्रदर्शनों के बाद इस्तीफ़ा दे दिया था. इन प्रदर्शनों में 850 लोग मारे गए थे.

तनाव के क्षण

काहिरा में बीबीसी संवादाता जॉन लेन का कहना है कि बहुत से मिस्र वासियों को सेना की मुबारक के खिलाफ़ मुकदमा चलाने की नीयत पर शक़ है. ऐसे लोग मानते हैं कि सेना कभी नहीं चाहेगी कि मुबारक अपमानित हों.

मुबारक के वकील का कहना है कि वो गंभीर रूप से बीमार हैं.

पिछले महीने से प्रदर्शनकारी एक बार फिर से तहरीर चौक पर जमा होने लगे हैं. इन लोगों की मांग है कि देश में शासन कर रही सैन्य परिषद मुबारक और उनके सहयोगियों के खिलाफ़ तेज़ी से मुक़दमे चलाए.

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