चीन ने हैकिंग के आरोप नकारे

  • 5 अगस्त 2011
Image caption चीन ने हैकिंग के आरोपों को ग़ैर-ज़िम्मेदाराना बताया

चीन के सरकारी मीडिया ने दुनिया भर में पिछले दिनों हुए साइबर हमलों के पीछे चीन का हाथ होने की बात को ग़ैर ज़िम्मेदाराना बताया है.

कंप्यूर की सुरक्षा की व्यवस्था करने वाली कंपनी मैकेफ़ी ने इस हफ़्ते की शुरुआत में कहा था कि पिछले पाँच वर्षों में 70 से अधिक संगठनों की वेबसाइटों को हैकरों ने लगातार निशाना बनाया

इनमें छह देशों की सरकारी वेबसाइटों के अलावा संयुक्त राष्ट्र और रक्षा क्षेत्र की कई कंपनियों की वेबसाइटें भी शामिल थीं.

बुधवार को जारी रिपोर्ट में मैकेफ़ी ने सीधे तौर पर चीन को इसके लिए ज़िम्मेदार नहीं ठहराया था मगर कई विशेषज्ञों ने अमरीकी अख़बार वॉशिंगटन पोस्ट में ये लिखा कि चीन के ही इसका दोषी होने की संभावना है.

इसके बाद चीन में पीपल्स डेली अख़बार ने कहा कि चीन को इंटरनेट हैकिंग से जोड़ने की कोशिश करना बिल्कुल ग़ैर-ज़िम्मेदाराना है.

'पुख़्ता आधार नहीं'

ये अख़बार चीन में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र माना जाता है. हालाँकि अख़बार में किसी अधिकारी के हवाल से तो बयान नहीं दिया गया है मगर उसमें छपा लेख ये कहता है कि मैकेफ़ी के आरोपों का कोई पुख़्ता आधार नहीं है.

मैकेफ़ी के मुताबिक़ हैकरों ने सिर्फ़ सरकारों को ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति तक को भी निशाना बनाया था.

मैकेफ़ी का कहना है कि ये हमले कई वर्षों से हो रहे हैं. कंपनी के अनुसार जिन 72 कंपनियों को साइबर हमलों में निशाना बनाया गया है उनमें से 49 अमरीका में स्थित हैं.

उसका कहना है कि साइबर हमले करने वाले सैन्य व्यवस्था और सैटेलाइट संचार व्यवस्था जैसी संवेदनशील जानकारियाँ हासिल करना चाहते थे.

मैकेफ़ी ने अपनी जाँच एक एजेंसी की पिछले पाँच वर्षों से चले आ रहे साइबर हमलों के अभियान पर केंद्रित रखा है.

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