इसराइल प्रदर्शनों से हिला

  • 7 अगस्त 2011
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इसराइल में अपनी तरह के अनोखे प्रदर्शन में पूरे देश में कई जगहों पर लाखों लोगों ने सड़कों पर निकल कर बढ़ती महंगाई के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया.

सबसे बड़ा प्रदर्शन देश की राजधानी तेल अवीव में हुआ जहाँ पुलिस के मुताबिक़ क़रीब दो लाख लोगों ने सड़क पर उतर कर प्रदर्शनों में भाग लिया.

इसी तरह से यरूशलम में तीस हज़ार लोगों ने रैली निकाली.

महंगाई से परेशान

दशकों में हुए सबसे बड़े आंदोलनों में से एक में प्रदर्शनकारी सरकार से मकानों और खाने पीने की चीज़ों की क़ीमतों पर लगाम लगाने की मांग कर रहे हैं.

कई प्रदर्शनकारियों ने तो शहर के बीच में तम्बू लगा लिए हैं.

पुलिस के प्रवक्ता मिकी रोज़ेन्फील्ड ने कहा कि तेल अवीव और यरूशलम की तरह ही देश के बाक़ी भागों में क़रीब बीस हज़ार लोगों ने और प्रदर्शन किए.

ये लगातार तीसरा शनिवार था जब इसराइली लोगों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किए. प्रदर्शनकारी पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीक़ा में प्रजातंत्र के लिए चल रहे प्रदर्शनों से भी सबक़ ले रहे हैं लेकिन वो यहाँ सरकार बदलने की मांग को लेकर प्रदर्शन नहीं कर रहे.

एहुद रोटेम नाम के 26 साल के एक छात्र ने कहा, " इस मुल्क में रहना मुश्किल हो गया है." रोटेम ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से बात करते हुए कहा कि इसराइली सेना में अनिवार्य समय देते हैं, बहुत मेहनत करते हैं और ऊँचे कर भरते हैं लेकिन बावजूद इन सबके, वो अपनी कमाई में अपना पूरा महीना नहीं गुज़ार सकते.

तेल अवीव के एक दूसरे निवासी ने कहा, "हालात बहुत ही बुरे होते जा रहे हैं और इतनी मेहनत करने के बाद भी हम शांति से जीवन नहीं बिता सकते, हमें हमेशा संघर्ष करना पड़ता है."

'एक क्रांति'

इस तरह के राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों के आयोजकों में से एक 33 वर्ष के बरोच ओरेन ने कहा की ये आंदोलन "किसी क्रांति से कम नहीं".

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Image caption ये दशकों में अपनी तरह के पहले इतने बड़े पैमाने पर हो रहे प्रदर्शन हैं

ओरेन कहते हैं, " दशकों से इस तरह का कुछ नहीं हुआ था. इतने लोगों का सड़कों पर आना और बदलाव की मांग करना."

इसराइल की आर्थिक प्रगति की रफ़्तार स्वस्थ ही है. इस देश का सकल घरेलू उत्पाद सालाना 4 .5 फ़ीसदी की औसत रफ़्तार से साल 2004 से बढ़ रहा है.

इस दौरान बेरोज़गारी की दर 11 प्रतिशत से घट कर छह प्रतिशत पर आ गई है. पर देश की जनता का मानना है कि इस आर्थिक प्रगति का लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंचा है.

प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतनयाहू ने लोगों की मांगों को अपनी प्राथमिकता सूची में शामिल करने का वादा किया है. नेतनयाहू के सहायक रोनी सोफर का कहना है कि रविवार को एक मंत्रियों के समूह की स्थापना होगी जो सितंबर तक एक कार्य योजना पेश करेगा.

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