सीरियाई राष्ट्रपति पर अंतरराष्ट्रीय दबाव

सीरिया इमेज कॉपीरइट BBC World Service

सीरियाई फ़ौज की ओर से प्रदर्शनकारियों पर किए जा रहे घातक हमलों के चलते अरब लीग ने सीरियाई सरकार से इस हिंसा पर तुरंत रोक लगाने की बात कही है वहीं सऊदी अरब ने सीरिया स्थित अपने राजदूत को वापस बुला लिया है.

जानकारों का मानना है कि अरब लीग का बयान और सऊदी अरब की ये कार्रवाई तयशुदा और क्रमबद्ध हो सकती है.

सऊदी अरब के इस बयान को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अब तक सऊदी अरब ने इस मामले में कोई दखल नहीं दिया था.

अब तक सऊदी अरब सहित अरब लीग के कई सदस्य देशों की ओर से यह माना जाता रहा है कि अरब देशों में बढ़ रहे आंदोलनों के बीच इस मसले पर हस्तक्षेप इन आंदोलनों को बढ़वा देगा.

रविवार को अरब लीग ने सीरिया की सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि वो प्रदर्शकारियों के खिलाफ़ हिंसक कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाए. अरब लीग ने अब तक के अपने सबसे कड़े रुख का परिचय देते हुए कहा कि सीरिया में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उसकी चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं.

इसके कुछ घंटों बाद सऊदी अरब के सरकारी चैनल अल-अरबिया पर सऊदी शासक अबदुल्ला का कड़े शब्दों में लिखा गया एक बयान पढ़कर सुनाया गया.

‘मौत की मशीन’

सऊदी शासक ने सीरियाई सरकार को ‘मौत की मशीन’ क़रार देते हुए कहा कि इससे पहले की बहुत देर हो जाए सीरियाई सरकार को इस हिंसा पर रोक लगानी होगी.

उन्होंने कहा कि सीरिया में जो रहा है उसे सऊदी अरब स्वीकार नहीं करेगा. सऊदी शासक ने कहा कि सारिया जल्द से जल्द सुधार लागू करने चाहिएं.

माना जा रहा है कि इस घटनाक्रम के बाद सीरिया के राष्ट्रपति सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बेहद बढ़ जाएगा.

ग़ौरतलब है कि हमा के बाद सीरिया की फ़ौजों ने देश के पूर्व में स्थित दार उल ज़ौर और हुला शहर पर हमला बोल दिया है.

विरोधी पक्ष के अनुसार इन हमलों में कम से कम 75 लोगों की मौत हो गई है. इस शहर में बड़ी तादाद में सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे थे.

मानव अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है की सीरिया की सेनाएँ पूरी ताकत के साथ टैंकों और बड़ी बख्तरबंद गाड़ियों से लैस हो कर इस शहर पर हमला बोल रही हैं.

कड़ी प्रतिक्रिया

राष्ट्रपति बशर अल असद का कहना है कि सीरिया सुधार की राह पर है लेकिन ये सरकार का फर्ज़ है कि वो अपराधियों का सामना करे.

इन हमलों को लेकर पोप और दमिश्क स्थित अमरीकी राजदूत भी अपनी कड़ी प्रतिक्रिया ज़ाहिर कर चुके हैं.

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का दावा है कि मार्च के मध्य से लेकर अब तक 1650 लोग मारे जा चुके हैं और दसियों हज़ार लोग बेघर हो चुके हैं.

इसके पहले गुरूवार को अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा था कि असद सरकार सत्ता में रहने का नैतिक अधिकार खो चुकी है.

क्लिंटन ने गुरूवार को एक बयान में कहा था कि, अमरीका असद सरकार के अपने ही लोगों के ख़िलाफ़ बढ़ते दमन को देख रहा है और अमरीका सोचता है कि ये सरकार कम से कम 2000 सीरियाई लोगों की मौतों के लिए ज़िम्मेदार है.

संबंधित समाचार