सैन्य कार्रवाई जारी, असद पर दबाव

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Image caption सीरिया के राष्ट्रपति असद पर लगातार दबाव बढ़ रहा है कि वो देश में सुधार प्रक्रिया को ठीक से लागू करें.

सीरिया की सेना ने देश के पूर्वी शहर दार अल ज़ौर पर लगातार दूसरे दिन बमबारी जारी रखी है जबकि राष्ट्रपति बशर अल असद पर दबाव लगातार बढ़ रहा है.

शहर के निवासियों और कार्यकर्ताओं का कहना है कि सोमवार की सुबह से गोलीबारी शुरु हो गई थी और सैनिकों का साथ देने के लिए बड़ी संख्या में टैंक शहर के पूर्वी छोर से घुसे हैं.

रविवार को दार उल ज़ौर पर शुरु हुए हमले में कम से कम 50 लोगों की मौत हो चुकी है.

इस बीच सऊदी अरब के किंग अब्दुल्ला ने कहा है कि सीरिया में आम प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ हो रही हिंसा को स्वीकार नहीं किया जा सकता.

किंग अब्दुल्ला का कहना था कि असद की सरकार को सही मायने में सुधारों को लागू करना होगा और मौत की मशीनों को रोकना होगा.

सऊदी अरब ने सीरिया में अपने राजदूत को बुलाया है ताकि सीरिया पर विस्तृत विचार विमर्श किया जा सके.

कुवैत ने भी इस मामले में कड़ी नाराज़गी जताते हुए सीरिया से अपना दूत वापस बुला लिया है.

सीरिया के एक और पड़ोसी देश जॉर्डन ने अपील की है कि सीरिया में समस्या के शांतिपूर्ण समाधान के लिए क़दम उठाए जाएं.

तुर्की और अरब लीग के देशों ने भी सीरिया की सरकार से अपील की है कि वो देश में सुधारों के लिए क़दम उठाएं.

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि मार्च महीने में शुरु हुए प्रदर्शनों में अब तक 1700 से अधिक लोग मारे गए हैं और हज़ारों की संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

पिछले एक सप्ताह में ही 300 से अधिक मौतों की ख़बर है.

नागरिकों की सुरक्षा

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Image caption किंग अब्दुल्ला ने नागरिकों के ख़िलाफ़ हिंसा पर नाराज़गी जताई है

सोमवार को स्थानीय समन्वय समिति ने बताया कि सुबह से मशीन गनों की गोलियों गूंज रही थी. स्थानीय समन्वय समिति कार्यकर्ताओं का एक समूह है जो शहर में प्रदर्शनों का आयोजन करती है और दस्तावेज तैयार करती है.

समाचार एजेंसी रायटर्स ने एक स्थानीय निवासी मोहम्मद के हवाले से बताया कि टैंकों से शहर के अल हवीका इलाक़े में जबर्दस्त गोलीबारी की गई है.

फरात नदी के किनारे बसे अल जोरा इलाक़े में भी टैंकों ने हमला किया है जहां से हज़ारों लोग घरों को छोड़कर भागे हैं.

मोहम्मद के अनुसार ‘‘ सभी निजी अस्पताल बंद हैं और लोग घायलों को अस्पतालों में भेजने से डर रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि अस्पतालों में भी खुफिया पुलिस है.’’

समाचार एजेंसी एएफपी ने एक कार्यकर्ता के हवाले से ख़बर दी है कि सेना ने भारी मशीनगनों से अल जोरा में फायरिंग की जिसके बाद तलाशी अभियान शुरु किया जिसमें स्थानीय लोगों को डराया गया है.

लंदन स्थित सीरिया ऑब्ज़र्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स समूह का कहना है कि सुरक्षा बल आम लोगों को गोली मार रहे हैं.

दार अल ज़ौरा सीरिया की राजधानी दमिश्क से 450 किलोमीटर पूर्व में है और रविवार की सुबह से ही शहर पर हमला किया गया था.

सरकारी मीडिया के अनुसार स्थानीय नेताओं ने सेना से अपील की थी कि वो आम लोगों की रक्षा करें.

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