इतिहास के पन्नों से

अगर इतिहास के पन्ने पलटें तो 10 अगस्त के दिन कई अहम घटनाएं हुईं थीं. वर्ष 1977 में इस दिन ब्रिटेन की महारानी ने लंबे समय के बाद ऑयरलैंड की यात्रा की थी. अंतरिक्ष यान मगैलन भी शुक्र ग्रह पर 10 अगस्त 1990 को ही ही उतरा था.

1977: ब्रिटेन की महारानी की ऑयरलैंड यात्रा के लिए भारी सुरक्षा

Image caption महारानी की यात्रा के लिए भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी.

ब्रिटेन की महारानी एलिज़बेथ ने 11 सालों के बाद उत्तरी ऑयरलैंड की यात्रा 10 अगस्त 1977 के दिन ही की थी.

जब वो शाही जहाज़ ब्रिटैनिया पर सवार होकर बेलफ़ास्ट पहुंची तो उन्हें 21 तोपों की सलामी दी गई. हालांकि, महारानी शहर में नहीं गईं क्योंकि उनकी यात्रा को लेकर जनता में दो तरह की राय थी.

ब्रिटेन का समर्थन करनेवाले लोगों ने ब्रिटेन का झंडा यूनियन जैक निकालकर फहराया हुआ था तो दूसरी तरफ़ ब्रिटेन का विरोध कर रही आईआरए ने खुले आम चेतावनी दी थी कि वो महारानी का ऐसा स्वागत करेंगे जिसे हमेशा याद रखा जाएगा.

आयरिश रिपब्लिकन आर्मी को उस दौरान ब्रिटेन में हुए कई चरमपंथी हमलों के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाता था.

इस कारण से कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए थे और 32,000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे जो महारानी की सुरक्षा के लिए लगाया जाने वाला सबसे बड़ा बल था.

1990: मगैलन ने शुक्र ग्रह का मानचित्रण शुरू किया

Image caption अंतरिक्ष यान को शुक्र पर पहुंचने में 15 महीने लगे थे.

पंद्रह महीने की यात्रा के बाद मगैलन अंतरिक्ष यान 10 अगस्त के ही दिन शुक्र पर पहुंचा था.

शुक्र पर उतरने से पहले कुछ देर तक के लिए उसका संपर्क कैलिफ़ोर्निया स्थित संचालन केंद्र से टूट गया था.

वैज्ञानिकों को उम्मीद थी कि मगैलन पृथ्वी से सबसे नज़दीक मौजूद गृह के बारे में बहुत सारे रहस्य उजागर कर सकेगा.

उन्हें लगता था कि वहाँ जीवन होने के कोई संकेत नहीं हैं.

शुक्र के वातावरण में कार्बन डाइआक्साइड भरी हुआ है. उसे घेरे रखनेवाला पीला बादल सलफ्यूरिक एसिड है और सतह इतना गर्म है कि सीसे को पिघला दे.

वैज्ञानिक ये जानने की कोशिश कर रहे हैं कि कहीं तापमान के इतने ज़्यादा होने की वजह ग्लोबल वार्मिंग तो नहीं है.

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