इतिहास के पन्नों से

  • 13 अगस्त 2011

इतिहास के पन्नों को पलटें तो 13 अगस्त 1966 को चीन ने सांस्कृतिक क्रांति की घोषणा की थी जबकि इसी दिन 1961 में बर्लिन के नागरिक एक बंटे हुए शहर में सोकर उठे थे:

1966: चीन ने सांस्कृतिक क्रांति की घोषणा की

Image caption सेंट्रल कमिटी ने अध्यक्ष माओ के 'सुधारक कार्यक्रमों' पर अपनी मुहर लगाई थी.

कम्युनिस्ट पार्टी की सेंट्रल कमिटी की बैठक के बाद चीन ने 13 अगस्त को 'आगे बढ़ने वाले एक नए क़दम' की घोषणा की थी.

कमिटी की नई योजना के मुताबिक़ चीन ने इस बात का दृढ संकल्प किया कि अपने नेता माओ ज़ेडोंग के विचारों को फैलाया जाए.

साथ ही इस बात के भी संकेत मिले थे कि देश उन लोगों को निकाल बाहर करेगा 'जिन्होंने अभी तक पूँजीवाद का अनुसरण किया है'.

रेडियो पेकिंग के समाचार प्रसारण के अनुसार सेंट्रल कमिटी ने अध्यक्ष माओ के विचारों पर अपनी मुहर लगाते हुए उनके 'सुधारक कार्यक्रमों' को 'एक महान सर्वहारा सांस्कृतिक क्रांति' की संज्ञा दी.

इस प्रसारण में इस बात पर भी बल दिया गया था कि चीन के नागरिकों को अपने आर्थिक लक्ष्यों की पूर्ति के लिए ज़्यादा प्रयास करने चाहिए.

अध्यक्ष माओ के नेतृत्व में चीन ने 1958 में औद्योगिक उत्पाद और कृषि क्षेत्र में तेज़ी लाने के प्रयास किए थे लेकिन उनकी योजना पूर्ण रूप से सफल नहीं हो सकी थी.

1961: बर्लिन के नागरिक एक बंटे हुए शहर में सोकर उठे

Image caption पूर्वी जर्मनी से भाग रहे हजारों शरणार्थियों के लिए एकमात्र भागने का रास्ता बंद हो गया

पूर्वी जर्मनी के सैनिकों ने 13 अगस्त 1961 को पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी के बीच की सीमारेखा को सील कर दिया था.

इसी के साथ पूर्वी जर्मनी से भाग रहे हजारों शरणार्थियों के लिए एकमात्र भागने का रास्ता बंद हो गया था.

रात के समय करीब छह फ़ुट ऊंचे कटीले तारों के जाल से दोनों देशों के बीच की सीमारेखा को सील कर दिया गया था और सुबह जब बर्लिन के निवासी जागे तो उन्हें इस बात का एहसास हुआ कि उनके शहर के दो हिस्से हो चुके हैं.

शहर के दो भागों के बीच चलने वाली रेल सेवा बाधित हो गई थी और सीमा पर यातायात ठप्प हो गया था.

दोपहर होते-होते हज़ारों गुस्साए प्रदर्शनकारी पश्चिमी हिस्से की तरफ़ जमा हो गए थे.

शाम के समय राष्ट्रीय प्रसारण पर जर्मनी के चांसलर कोनरैड अदेनौर ने शांति की अपील जारी की और कहा कि पूर्वी हिस्से के लोग पहले भी हमारे भाई-बहन थे और आगे भी रहेंगे.

उधर अमरीका के विदेश मंत्री डीन रस्क ने कहा कि इस तरह की रुकावट पहले हुए एक समझौते के अनुरूप नहीं है.

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