चीनी विमानवाहक युद्धपोत का सीमित सामरिक महत्व

चीनी विमानवाहक का पुराना नाम वारयाग है इमेज कॉपीरइट BBC World Service

चीनी नौसेना के पहले विमानवाहक पोत ने समुद्र मे परीक्षण किया है.

लेकिन फ़िलहाल किसी को ज़्यादा चिंता करने की ज़रूरत नहीं है, चाहे क्षेत्रिय स्तर पर नौसैनिक बढ़ते हथियारों के सिलसिले में एक नई कड़ी ज़रूर जुड़ गई है.

ये चीनी नौसेना के लिए मूल का पत्थर ज़रूर है. लेकिन इस क़दम का सीमित तात्कालिक सामरिक महत्व है. नौसेना के बारे में जानकार विशेषज्ञों का तो यही मानना है.

मरम्मत के बाद सोवियत डिज़ाइन वाला यूक्ररेन का पूर्व युद्धपोत विमानवाहक युद्धपोतों के व्यवसाय में चीन के पहले क़दम का प्रतीक है.

इसका इस्तेमाल प्रशिक्षण और विमानवाहक युद्धपोतों के व्यवसाय को समझने के लिए किया जाएगा.

तात्कालिक दृष्टि से इस पोत में अमरीकी युद्धपोतों की तरह आसमान में श्रेष्ठता, रेडार और ख़ुफ़िया जानकारी अर्जित करने की क्षमता नहीं हैं.

चीन की ओर से भी आधिकारिक तौर पर इसके बारे में दबे स्वर में ही बयान आए हैं जो शायद प्रशिक्षण में इस पोत की भूमिका का सूचक हैं. लेकिन चीन के पड़ोसियों को चिंता करने का एक और कारण मिल गया है.

क्षेत्र, अन्य देशों पर असर

क्षेत्र में हथियारों की होड़ का कारण ये है कि अब चीन अपने तट से दूर हवाई और नौसैनिक सक्रियता बढ़ा सकेगा.

वियतनाम की छह रूसी किलो-श्रेणी की पणडुब्बियाँ ख़रीदने की योजना है.

ताईवान का दावा है कि उसने तेज़ गति से चलने वाला एक लड़ाकू जलपोत विकसित किया है जो एक समुद्री जहाज़ से दूसरे समुद्री जहाज़ को मिसाइलों से लैस कर सकता है और ये विमानवाहक युद्धपोतों को नष्ट कर सकते हैं.

चीन के पास पहले से ही ऐसा हथियार है और उसका मानना है कि यदि भविष्य में कोई संकट पैदा होता है तो वह अमरीकी सैन्य अभियान में बाधा खड़ी कर सकता है.

चीन के अपनी फ़ौज को आधुनिक बनाने के अभियान से क्षेत्र के छोटे खिला़ड़ी - वियतनाम और फ़िलिपींस अमरीका के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए प्रेरित होंगे.

साऊथ चाइना के समुद्र में क्षेत्रीय विवाद नौसेना को आधुनिक बनाने की योजनाएँ का एक कारण हैं.

दुनिया में हर साल समुद्र के ज़रिए होने वाली वाणिज्य गतिविधियों में से आधी इस क्षेत्र में होती हैं और नौसेना का महत्व बढ़ता जा रहा है.

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