इटली में भारी कटौतियों का ऐलान

त्रेमोंती और बर्लुस्कोनी इमेज कॉपीरइट Reuters

ऋण संकट से जूझ रहे इटली में कैबिनेट की एक बैठक में ताज़ा कटौतियों का ऐलान किया गया है.

चौंसठ अरब अमरीकी डॉलर की इस योजना का उद्देश्य साल 2013 तक इटली की बजट को संतुलन में लाना है.

देश के प्रधानमंत्री सिलवियो बर्लस्कुनी ने कहा है कि ये कटौती दुखदायक लेकिन ज़रुरी है.

सोमवार को यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने कहा था कि वो इटली के कर्ज़े को ख़रीद लेगा ताकि उसके ऋण लेने की क़ीमत कम हो सके.

ये नए क़दम इसी वर्ष जुलाई में घोषित कटौतियों के बाद आए हैं जिनका मक़सद साल 2014 तक बजट को संतुलित करने का था.

लेकिन शुक्रवार को घोषित कटौतियों से ठीक पहले इटली की कर्ज़ा लेने की क़ीमतों में तेज़ उछाल आया है क्योंकि निवेशकों ने सरकार के घाटा कम करने की क्षमता पर विश्वास खो दिया है.

यूरोप के सैंट्रल बैंक के दबाव के कारण इटली को जल्दी में ये क़दम उठाना पड़ा है.

'हमारे दिल लहूलुहान हैं'

शुक्रवार की बैठक के बाद कैबिनेट ने साल 2012 में 20 अरब डॉलर और 2013 में 25 अरब डॉलर की कटौती का ऐलान सर्वसम्मति से किया है.

बैठक के बाद सिलिवियो बर्लुस्कोनी ने कहा, "हमारे दिल लहूलुहान हैं. इस सरकार ने वादा किया था कि वो इटली के नागरिकों की जेब में हाथ नहीं डालेगी लेकिन दुनिया के हालात बदल गए हैं."

कैबिनेट के फ़ैसले के बाद निकट भविष्य में 50 हज़ार लोग सरकारी नौकरी खो देंगे. साथ सप्ताह के बीच पड़ने वाली छुट्टियों को रविवार को दिया जाएगा ताकि साल में काम करने के दिनों में बढ़ोतरी हो सके.

इसके अलावा डेढ़ लाख यूरो से अधिक कमाई करने वालों पर अगले दो साल के लिए 10 प्रतिशत अतिरिक्त कर लगाया जाएगा. इसे 'सोलिडेरिटी टैक्स' का नाम दिया गया है.

अब कैबिनेट का फ़ैसला इटली की संसद में जाएगा जहां 60 दिनों के भीतर इनका अनुमोदन होना आवश्यक है.

लेकिन जानकार इटली की इन कटौतियों के दुष्प्रभावों की ओर भी इशारा कर रहे हैं.

बार्कलेज़ कैपिटल के एक विश्लेषक फ़ैबियो फ़ोइस ने कहा है कि इन क़दमों से इटली में अगले साल उपभोक्ता क्षमता में कमी आ सकती है जिसका कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था पर और नकारात्मक असर पड़ेगा.

संबंधित समाचार