इंग्लैंड दंगे: कारणों पर बहस

  • 15 अगस्त 2011
डेविड कैमरन
Image caption कैमरन का कहना है लूटपाट का कारण ग़रीबी नहीं लोगों का आचरण है

इंग्लैंड में पिछले सप्ताह भड़के दंगों को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी ज़ोर पकड़ रही है.

प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा है कि सरकार देश के बिखरे समाज को ठीक करने के लिए अपनी नीतियों के हर पहलू की समीक्षा करेगी.

मगर विपक्षी लेबर पार्टी ने उनपर बग़ैर मुद्दों को गहराई से समझे, छिछली बयानबाज़ी और तिकड़म करने का आरोप लगाया है.

उधर अदालतों में दंगों, लूटपाट और अव्यवस्था फैलाने के आरोप में गिरफ़्तार किए गए सैकड़ों लोगों की सुनवाई लगातार जारी है.

सोमवार सुबह तक 2,772 लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका था और उनमें से 1,406 लोगों के ख़िलाफ़ आरोप तय किए जा चुके हैं.

सामाजिक कारण

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा कि पिछले हफ़्ते जो हुआ वो एक वेक अप कॉल यानी नींद से जगानेवाला अलार्म यानी ब्रिटेन को सतर्क करनेवाली एक घटना थी.

उन्होंने ऑक्सफ़ोर्डशर में अपने संसदीय क्षेत्र विटनी में एक युवा क्लब में कहा कि ब्रिटेन के कुछ हिस्सों में धीमी गति से हो रहे नैतिक पतन को रोकने के लिए हर सरकारी नीति की समीक्षा की जाएगी.

उन्होंने एक बार फिर इस लूटपाट के लिए ग़रीबी और अभाव को नहीं बल्कि समाज की नैतिक और सांस्कृतिक कमज़ोरियों को ज़िम्मेदार ठहराया.

उन्होंने कहा,"ये दंगे नस्ल से जुड़े नहीं थे, दंगाई और पीड़ित गोरे, काले और एशियाई थे. ये दंगे सरकार की कटौतियों के बारे में नहीं थे, उनका निशाना दूकानें थीं, संसद नहीं.

"ये दंगा लोगों के आचरण से जुड़ा था, ऐसा आचरण जिसमें लोग सही-ग़लत के अंतर से अनजान रहते हैं, जिसमें लोगों में आत्मसंयम नाम की चीज़ बिल्कुल नहीं होती."

तिकड़म

Image caption एड मिलिबैंड का कहना है कि समाज और अर्थव्यवस्था एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं

प्रधानमंत्री कैमरन के भाषण के थोड़ी ही देर बाद ब्रिटेन ने नेता विपक्ष, लेबर नेता एड मिलिबैंड ने भी लंदन में अपने पुराने स्कूल में एक भाषण दिया जो दंगा प्रभावित कैमडन इलाक़े में स्थित है.

कैमरन ने ज़िम्मेदारियों को लेकर जो सवाल उठाए, एड मिलिबैंड ने भी उसी तरह की बात की, लेकिन उन्होंने साथ ही कहा कि असमानता और युवाओं के बीच अवसरों की कमी भी समस्या के कारण हैं.

मिलिबैंड ने कहा कि प्रधानमंत्री जो भी कुछ बोल रहे हैं वो बस आवेश में आकर हो रही तिकड़म है जबकि ज़रूरत वास्तविक और स्थायी समाधानों की है.

एड मिलिबैंड ने कहा,"जनता बेशक कहती है कि वो जल्द कार्रवाई चाहते हैं, मगर एक दिन में एक नई नीति लाना, इस तरह के बिना संपूर्ण सोच के, आवेश में की जा रही तिकड़में – इनसे समस्या नहीं सुलझेगी."

मिलिबैंड ने कहा कि समाज और अर्थव्यवस्था एक दूसरे से जुड़े हुए हैं.

उन्होंने कहा कि टूटे हुए परिवारों और बच्चों के ग़लत लालन-पालन को दंगों के लिए ज़िम्मेदार ठहराना बड़ा आसान है.

बैंकिंग संकट और फ़ोन हैकिंग विवाद का उल्लेख करते हुए एड मिलिबैंड ने कहा कि जो लोग कमज़ोर लोगों के बीमार बर्ताव की बात उठाए जा रहे हैं उन्हें ताक़तवर लोगों के बीमार बर्ताव की भी बात करनी चाहिए.

संबंधित समाचार