सीरिया में युद्धपोत और टैंकों से फ़ौजी कार्रवाई

  • 15 अगस्त 2011
सीरिया में प्रदर्शनकारी और सैनिक इमेज कॉपीरइट BBC World Service

उत्तरी सीरिया में स्थित तटवर्ती शहर लाताकिया में फ़ौजों ने विद्रोहियों पर समुद्र से और ज़मीन पर भीषण हमले किए हैं. मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार कम से कम 19 लोग मारे गए हैं.

पहली बार सीरियाई फ़ौज ने युद्धपोत इस लड़ाई में उतारे हैं और टैंकों के ज़रिए रिहायशी इलाक़ों में गोलाबारी हुई है.

मिस्र और ट्यूनिशिया में इस साल फ़रवरी में भड़के सरकार विरोधी प्रदर्शनों और सत्ता परिवर्तन के बाद से सीरिया में मार्च से ही सरकार विरोधी प्रदर्शन कर रहे हैं.

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार मार्च से अब तक देश में 1700 आम नागरिक फ़ौज की कार्रवाई में मारे गए हैं.

प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति बशर अल असद के इस्तीफ़े और व्यापक राजनीतिक सुधारों की मांग कर रहे हैं.

सीरिया में पिछले 40 साल से असद परिवार सत्ता में बना हुआ है और राष्ट्रपति असद ने कुछ राजनीतिक सुधारों का वादा भी किया है.

दो युद्धपोत, 20 टैंक और बख़तरबंद वाहन उतारे

लाताकिया के दो रिहायशी इलाक़ों में असद विरोधी भीषण प्रदर्शन हुए हैं.

कुछ समय के लिए विद्रोहियों ने वहाँ मौजूद सरकारी सेना को घेर कर भी रखा था.

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Image caption पिछले 40 साल से सत्ता में बने हुए असद परिवार के ख़िलाफ़ विद्रोह हो रहा है

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार पिछले दो दिन में सरकारी सेना ने जिस तीव्रता से हमला किया है वैसा पहले कभी नहीं दिखाई दिया.

लगभग 20 टैंक, दो युद्धपोत और कई बख़तरबंद वाहन सीरियाई फ़ौज की इस कार्रवाई में भाग ले रहे हैं.

एक प्रत्यक्षदर्शी ने रॉयटर्स समाचार एजेंसी को बताया, "मैं दो नौसैनिक जहाज़ों का आकार देख सकता हूँ. वे अपनी बंदूकों से लगातार गोलाबारी कर रहे हैं. इसका असर अल-रामलेह, अल-फ़लिस्तीनी और अल-शबाब रिहायशी इलाक़ों पर हो रहा है."

अनेक लोग शहर को छोड़कर भाग गए हैं. फ़ोन की लाइनें काट दी गई हैं और इंटरनेट भी काम नहीं कर रहा है. सीरिया में अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों के काम करने पर कई तरह की पाबंदियाँ हैं और रिपोर्टों की पुष्टि कर पाना मुश्किल है.

पिछले कई हफ़्तों से सीरिया पर ऐसी कार्रवाई बंद करने का अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और सऊदी अरब के बादशाह शाह अबदुल्लाह ने संयुक्त रूप से सीरियाई सरकार से कहा है कि वो अपने नागरिकों के ख़िलाफ़ हिंसा के इस्तेमाल को फ़ौरन बंद करे.

अमरीका ने सीरिया के ख़िलाफ़ प्रतिबंध भी लगाए हैं. सऊदी अरब, बहरीन और कुवैत ने सीरिया से अपने राजदूत वापस बुला लिए हैं जबकि तुर्की ने भी सीरियाई फ़ौज की कार्रवाई को अस्वीकार्य बताया है.

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