इतिहास के पन्नों से

वर्ष 1992 में 18 अगस्त के दिन सर्बिया के बंदी गृहों की आलोचना हुई जबकि 1964 में दक्षिण अफ़्रीका को ओलंपिक खेलों में भाग लेने से मना कर दिया गया.

1992: सर्बिया के बंदी गृहों की आलोचना

Image caption सर्बिया में दो बंदी गृहों की तुलना 'पृथ्वी पर नर्क' के समान की गई.

सर्बिया में दो बंदी गृहों की तुलना 'पृथ्वी पर नरक' के समान की गई और आज ही के दिन इनका दौरा कर रहे एक शिष्टमंडल के प्रमुख ने इन बंदी गृहों का दौरा करने के बाद यहाँ के हालातों को बदतर बताया.

फ़्रांस के मानवाधिकारों मामलों के मंत्री बर्नार्ड कौशनर ने कहा था कि यूरोप की सरकारों को त्रोंयोप्ली और मन्यांका में स्थित इन बंदी शिविरों को बंद कराने के लिए प्रयास करने चाहिए.

एक हफ्ते़ पहले टेलीविज़न पर दिखाई गई भयावह तस्वीरों के बाद दुनिया भर में इन बंदी गृहों के ख़िलाफ़ ख़ासी आवाज़ उठी थी और उसी के बाद एक प्रतिनिधिमंडल ने इस शिविर का दौरा किया.

कंटीले तारों के पीछे कई बंधकों की तस्वीरें दुनिया भर में छपी थीं और लोगों ने इनकी तुलना नाज़ी बंदी गृहों से की है.

हालांकि इन शिविरों की निगरानी कर रहे सर्बिया के सुरक्षा कर्मियों ने इस बात से इनकार किया कि ये बंधक भूख से मरने की कगार पर थे और कहा है कि 'ये लोग सिर्फ़ बीमार थे'.

सर्बिया ने इन बंदी गृहों की स्थापना को सही ठहराते हुए कहा कि 'ये उन मुसलमानों कि पूछताछ एक लिए बनाया गया केंद्र है जिनपर लड़ाके होने का श़क है'.

1964: दक्षिण अफ़्रीका पर ओलंपिक खेलों में भाग लेने से मनाही

Image caption ओलंपिक संघ का ये फ़ैसला 1992 में बार्सिलोना ओलंपिक खेलों तक रहा.

आज ही के दिन दक्षिण अफ़्रीका को टोक्यो में होने वाले 18वें ओलंपिक खेलों में भाग लेने से मना कर दिया गया था.

ये क़दम इसलिए उठाया गया था क्योंकि दक्षिण अफ़्रीका ने रंगभेद की निंदा करने से मना कर दिया था.

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ ने इस फैसले की घोषणा स्विट्ज़रलैंड में तब की जब दक्षिण अफ़्रीका को 16 अगस्त तक की दी गई मोहलत समाप्त हो गई.

फ़ैसला सुनाने के बाद अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ ने कहा कि ये फ़ैसला वापस तब लिया जाएगा जब दक्षिण अफ़्रीका खेल-कूद में जातीय भेदभाव ख़त्म करेगा और अपने देश में गोरे और काले खिलाड़ियों में भेदभाव बंद कर देगा.

हालांकि इस घोषणा के पहले दक्षिण अफ़्रीका ने कहा था कि ओलंपिक खेलों में जाने वाले 62 खिलाड़ियों के दल में वो सात काले लोगों को भी शामिल कर रहा है, लेकिन इस कदम से भी बात नहीं बनी.

ओलंपिक खेलों में भाग न ले पाने वाला ओलंपिक संघ का ये फ़ैसला 1992 में बार्सिलोना ओलंपिक खेलों तक रहा.

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