काले वैज्ञानिकों के साथ हुआ भेदभाव

  • 19 अगस्त 2011
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अमरीका में किए गए एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण में पाया गया है कि काले वैज्ञानिक शोधकर्ताओं को किसी गोरे की तुलना में अनुदान मिलने की संभावना बहुत कम होती है.

ये सर्वेक्षण दुनिया के प्रमुख चिकित्सा संस्थाओं में से एक 'नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ हेल्थ' पर केंद्रित है.

इस संस्था के निदेशक ने इस सर्वेक्षण के नतीजों पर कहा है कि वे इस पर ज़रुर कार्रवाई करेंगे.

अमरीका में 12.6 प्रतिशत आबादी काले लोगों की है.

लेकिन इस बायोमेडिकल संस्थान में उच्च पदों पर उनकी संख्या बहुत कम है.

भेदभाव

'नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ हेल्थ' (एनआईएच)में असमानता की आशंकाएं जताए जाने के बाद ये सर्वेक्षण किया गया है.

एनआईएच दुनिया में मेडिकल रिसर्च को धन मुहैया करवाने वाली बड़ी संस्थाओं में से एक है और यहाँ किया गया सर्वेक्षण कहता है कि जितने कम काले लोगों को शोध के लिए अनुदान दिए गए हैं उससे उनको नुक़सान हुआ है.

इस सर्वेक्षण के नतीजे गुरुवार को प्रकाशित हुए हैं और इसमें एनआईएच के अनुदानों के लिए वर्ष 2000 से 2006 तक दिए गए लगभग 40 हज़ार शोध आवेदनों का परीक्षण किया गया.

शोध में पता चला कि अनुदान के लिए आवेदन करने वालों में से 71 प्रतिशत गोरे थे, सिर्फ़ 1.5 प्रतिशत काले थे, 3.3 प्रतिशत लातिनी देशों के थे, 13.5 प्रतिशत एशियाई थे जबकि 11 प्रतिशत अन्य थे या उनके बारे में जानकारी नहीं थी.

एनआईएच के निदेशक फ़्रांसिस कॉलिन्स ने कहा है कि ये अस्वीकार्य है और उन्होंने वादा किया है कि वे अनुदान देने की प्रक्रिया में संस्थान के भीतर जो पूर्वाग्रह है उसे दूर करेंगे.

इसके बाद इस संस्थान में दिए गए आवेदनों का सिर्फ़ वैज्ञानिक गुणवत्ता के आधार पर परीक्षण किया जाएगा, बिना इस जानकारी के कि आवेदक कौन है और उसकी पृष्ठभूमि क्या है.

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