लीबिया: दो प्रमुख शहरों पर कब्ज़े का दावा

  • 20 अगस्त 2011
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Image caption लीबिया में विद्रोही दो महत्वपूर्ण शहरों पर नियंत्रण करने की कोशिश में हैं.

लीबिया में कर्नल गद्दाफ़ी के तख्तापलट की कोशिशों में लगे विद्रोहियों ने राजधानी त्रिपोली के नज़दीक दो प्रमुख शहरों पर कब्ज़े का दावा किया है.

विद्रोहियों का कहना है कि त्रिपोली से 160 किलोमीटर पूर्व में स्थित ज़िल्तान शहर सहित त्रिपोली से सिर्फ़ 30 किलोमीटर दूर ज़ाविया शहर पर भी उनका नियंत्रण हो गया है. उनका कहना है कि इस लड़ाई में उन्हें भारी नुकसान हुआ है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के हवाले से विद्रोहियों के इस दावे को खारिज करते हुए लीबियाई सरकार ने कहा है कि ये इलाके अब भी सेना के कब्ज़े में हैं.

इस बीच राजधानी त्रिपोली से हज़ारों की संख्या में मौजूद विदेशी राहतकर्मियों को बाहर निकालने की कवायद तेज़ कर दी गई है.

समाचार एजेंसी एपी ने मिसराता विद्रोही सैन्य काउंसिल के मुनीर रमज़ी के हवाले से कहा है कि ज़िल्तान पर विद्रोही गुटों का नियंत्रण है और शुक्रवार को भीषण लड़ाई के बाद गद्दाफी की सेना भाग गई है. इस संघर्ष में विद्रोही गुटों के 31 सैनिक मारे गए हैं और 120 सैनिक घायल हुए हैं.

गद्दाफ़ी के लिए मुश्किलें

मिसराता के पास स्थित इस शहर पर विद्रोहियों का नियंत्रण कर्नल गद्दाफ़ी के लिए मुश्किलें खड़ी करने वाला है.

ज़ाविया पर विद्रोहियों के नियंत्रण से त्रिपोली का संपर्क ट्यूनिशिया से कट जाएगा जो गद्दाफी की सेना के लिए राहत का एक बड़ा ज़रिया बना हुआ है.

गुरुवार को विद्रोहियों ने शहर के बाहर एक तेल शोधन संयंत्र को अपने कब्ज़े में ले लिया था. इसी संयंत्र से गद्दाफ़ी की सेनाओं को तेल दिया जा रहा था.

विद्रोही सेनाओं त्रिपोली के दक्षिण से भी आक्रमण कर रही हैं.

संयुक्त राष्ट्र के आदेश पर नैटो सेनाओं ने त्रिपोली के आसपास नौ फ्लाई ज़ोन बना रखा है ताकि हवाई हमलों न हों और आम नागरिकों को बचाया जा सके. नैटो सेनाओं ने त्रिपोली का समुद्र से संपर्क भी काट दिया है.

इस बीच कर्नल गद्दाफ़ी के पूर्व सहयोगी यूरोप जा रहे हैं और उन्होंने गद्दाफ़ी का साथ छोड़ दिया है.

अबदल सलाम ने 1969 में हुए तख्तापलट में गद्दाफ़ी की मदद की थी लेकिन नब्बे के दशक में गद्दाफ़ी से उनके मतभेद पैदा हो गए थे.

लीबिया में फरवरी के महीने में उस समय विद्रोह शुरु हुआ जब पड़ोसी देश ट्यूनीशिया में जनविद्रोह के बाद तख्तापलट हो गया.

मिस्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के बीच लीबिया में भी प्रदर्शन हुए लेकिन गद्दाफी के सैनिकों ने प्रदर्शनकारियों पर हिंसा का प्रयोग किया जिसके बाद वहां संघर्ष सशस्त्र हो गया.

संघर्ष के दौरान विद्रोही देश के पूर्व में नियंत्रण स्थापित करने में कामयाब रहे लेकिन त्रिपोली में गद्दाफ़ी की सेनाएं अभी भी मज़बूत स्थिति में बताई जाती हैं.

संघर्ष के कारण त्रिपोली में हज़ारों की संख्या में अप्रवासी मज़दूर और कामगार भी फंसे हुए हैं जिनमें से कई मिस्र के नागरिक हैं.

लीबिया में संघर्ष शुरु होने के बाद साठ हज़ार से अधिक अप्रवासी मज़दूर देश से निकलने में सफल रहे हैं लेकिन अभी भी हज़ारों विदेशी कामगार लीबिया में मौजूद हैं.

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