'भारत में आतंकवाद से मौतें घटीं'

  • 19 अगस्त 2011
क़साब

एक रिपोर्ट के मुताबिक़ पहले के मुक़ाबले भारत में पिछले साल हुई आंतकवादी घटनाओं में कम लोग मारे गए हैं लेकिन वह अभी भी आंतकवाद से सबसे ज़्यादा प्रभावित देशों में से एक है.

आतंकवाद पर अमरीकी विदेश विभाग की विभिन्न देशों पर आने वाली वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल भारत में आतंकवादी घटनाओं में 1900 लोगों की मौत हुई थी जिसमें आम नागरिक, सुरक्षाबल और आतंकवादी भी शामिल थे.

इस रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत आतंकवाद से सबसे ज़्यादा प्रभावित देशों में से एक है.

वर्ष 2010 के लिए जारी की गई इस रिपोर्ट के मुताबिक़,"कश्मीर में छह महीने तक लगातार हुई हिंसक घटनाओं और पाकिस्तान की तरफ़ से नियंत्रण रेखा पार कर घुसपैठ करने की कोशिश, भारत सरकार के लिए चिंता का विषय बना रहा."

गुरुवार को जारी की गई इस वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है, "मई के महीने में भारत की अदालत ने वर्ष 2008 में मुंबई में हुए आतंकवादी हमले में दोषी पाए गए हमलावर अजमल क़साब को फांसी की सज़ा सुनाई थी."

प्रशंसा

रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत ने आतंकवाद से निपटने के लिए क़दम उठाए हैं और उसके लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन विशेषतौर पर अमरीका का सहयोग भी उसे दिया गया है.

अमरीकी विदेश विभाग ने आतंकवाद से निपटने के लिए उठाए गए क़दमों के लिए भारत की प्रशंसा भी की.

Image caption 2008 में हुए आतंकवादी हमले में 170 से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

इस रिपोर्ट में भारतीय सुरक्षाबलों के हॉकी वर्ल्ड कप और राष्ट्रमंडल खेलों के सफलतापूर्वक आयोजन करवाने पर भी तारीफ़ की गई है. इसमें कहा गया है कि आयोजनों के दौरान सुरक्षा के पुख़्ता इंतज़ाम किए गए थे.

साल 2010 में भारतीय अधिकारियों ने कई संदिग्ध चरमपंथियों को गिरफ़्तार किया था, हथियारों के ज़खीरे को ज़ब्त किया था और सरकार आंतरिक सुरक्षा से निपटने के लिए नए संगठन बनाने की लगातार कोशिश कर रही है.

साथ ही रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने सीमा पर, ख़ासतौर पाकिस्तान की सीमा से लगे क्षेत्रों पर सुरक्षा सुधारी है और आतंकवादियों को वित्तीय सहायता देने वालों के ख़िलाफ़ क़ानून को और सख़्त किया है.

समझौता

रिपोर्ट के अनुसार जुलाई महीने में भारत और अमरीका ने आतंकवाद से निपटने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे जिसने आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई करने के लिए दोनों देशों के बीच और अधिक सहयोग का रास्ता साफ़ किया है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत पूरे वर्ष आतंकवाद से निपटने के लिए अपनी तैयारी को और बेहतर करता रहा .

भारत के गृह मंत्रालय की साल 2009-2010 के लिए आई वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक़ 2008 के मुंबई हमलों के बाद त्वरित कार्रवाई करने वाली टीम का चार क्षेत्रीय इलाक़ो कोलकाता, चैन्नई, मुम्बई और हैदराबाद में गठन किया गया है.

इसमें 1086 प्रशिक्षित सदस्य हैं और दिल्ली एयरपोर्ट पर भी अतिरिक्त बल तैनात हैं ताकि आपातकालिन स्थिति में उनका इस्तेमाल किया जा सके.

रिपोर्ट के मुताबिक़ गृह मंत्रालय ने आत्मसमर्पण के साथ-साथ पुनर्वास की नीति को भी बढ़ावा दिया है ताकि दिग्भ्रमित युवा और चरमपंथी आत्मसमर्पण कर सकें.

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