इतिहास के पन्नों से...

  • 23 अगस्त 2011

अगर इतिहास के पन्नें पलटें तो पाएंगें कि 23 अगस्त के दिन जहां ईरान में कुर्द नागरिकों का विद्रोह तेज़ हुआ, वहीं सद्दाम हुसैन को बंदियों के साथ टेलीविज़न पर दिखाए जाने पर बवाल पैदा हो गया था.

1979: ईरान में कुर्द नागरिकों का विद्रोह तेज़ हुआ

Image caption इस विद्रोह के दौरान लगभग 600 लोगों की मौत हुई थी.

साल 1979 में इसी दिन ईरान में मौजूद कुर्द नागरिकों ने इराक़ी सीमा क्षेत्र पर मौजूद सरकारी सैनिकों को खदेड़ दिया था.

इरान के उत्तरी-पश्चिमी भाग में कुर्दिस्तान के महाबाद नाम के शहर पर कुर्द विद्रोहियों ने पूरा क़ब्ज़ा हासिल कर लिया था.

ये विद्रोह धीरे धीरे दीवान दारेह, साक़ेज़ और महाबाद नाम के शहरों में फैल गया.

कुर्द नेताओं ने अपने मक़सद पर चर्चा के लिए ईरान के धर्मगुरु अयातुल्लाह ख़ोमैनी से मुलाक़ात की, लेकिन अयातुल्लाह ने उन्हें चेतावनी दी कि वे ईरान से अलग होने की कोशिश न करें.

अयातुल्लाह ने बाग़ी कुर्द नागरिकों की ग़िरफ़्तारी के आदेश दिए, जिसके बाद कई नागरिक भूमिगत हो गए थे.

दरअसल ईरान में मौजूद क़रीब 40 लाख कुर्द नागरिक, शाह को देश से निकाले जाने से निराश थे और उनका कहना था कि इस्लामी राज्य बनने के बाद उन्हें ज़्यादा स्वायत्ता नहीं मिल पाई.

ईरानी सेना और कुर्द नागरिकों के बीच 1983 तक झड़पें चली. उधर इराक़ में कुर्द लोगों को दबाए जाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी निंदा हो रही थी.

1990: इराक़ी टीवी कार्यक्रम पर सद्दाम के आने से बवाल

Image caption इस प्रसारण की ब्रिटेन और अमरीका ने कड़ी निंदा की थी.

23 अगस्त 1990 के दिन इराक़ी सरकारी टेलीविज़न पर सद्दाम हुसैन के पश्चिमी बंदियों के साथ दिखाए जाने पर बहुत बड़ा बवाल पैदा हो गया था.

क़ुवैत पर इराक़ी क़ब्ज़े के बाद ब्रितानी लोगों को इराक़ में बंदी बनाया गया था. सद्दाम हुसैन ने ब्रितानी बंदियों को कहा कि उन्हें इसलिए क़ैद किया गया है, ताकि युद्ध की स्थिति से बचा जा सके.

साथ ही उन्होंने बंदियों को आश्वस्त कराया कि वे इराक़ में सुरक्षित हैं और उन्हें ‘मानव कवच’ को तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाएगा.

सद्दाम को टेलीविज़न पर बंदियों को ये कहते हुए सुना जा सकता था कि वे शांति के नायक साबित होंगें.

इस प्रसारण के बाद काफ़ी बवाल मचा था और ब्रितानी विदेश सचिव समेत अमरीका ने इसकी कड़ी निंदा की थी.

इन बंदियों को चार महीने की क़ैद के बाद रिहा किया गया था.

इराक़ी नेता सद्दाम हुसैन ने कुवैत से अपनी सेना हटाने से इनकार कर दिया था जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र को 1991 में ऑपरेशन डेज़र्ट स्टॉर्म शुरु करना पड़ा.

इस मुहिम के एक महीने बाद इराक़ी सेना को खदेड़ दिया गया और कुवैत से बाहर निकाल दिया गया.

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