लीबिया में परीक्षा की घड़ी

ताजुरा में विद्रोही इमेज कॉपीरइट Getty

लीबिया की राजधानी त्रिपोली में विद्रोही फ़ौजों के पहुँचने के साथ ही कर्नल ग़द्दाफ़ी का सूर्यास्त होता दिख रहा है.

पर लीबिया के लिए ये परीक्षा की घड़ी है. अब सवाल ये बने हैं कि क्या ग़द्दाफ़ी शासन के अंत के साथ ही सशस्त्र संघर्ष भी जल्दी ही समाप्त हो जाएगा?

और अगर मौजूदा शासन हट भी गया तो होगा क्या? क्या एक नई क़ानून व्यवस्था वहाँ लागू हो पाएगी या अफ़रा-तफ़री का माहौल होगा? वहाँ नए सिरे से एक शासन खड़ा करने की कोशिश होगी या प्राथमिकता होगी बदला लेना?

ये नैटो फ़ौजों के लिए भी परीक्षा से कम नहीं है और ख़ास तौर पर उन पश्चिमी देशों के लिए जो विद्रोहियों को समर्थन दे रहे थे.

जैसे-जैसे विद्रोही फ़ौज आगे बढ़ रही थीं ख़बरों के अनुसार लीबियाई सरकार के बड़े-बड़े हथियारों को हवाई निशाने से तबाह कर दिया गया.

मगर इन सबके बावजूद नैटो लगातार ज़ोर इसी बात पर दे रहा है कि वह तो सिर्फ़ लीबियाई नागरिकों को बचाने की कोशिश कर रहा है.

विद्रोहियों में भरोसा

पिछले कुछ दिनों में नैटो फ़ौज की बमबारी में लीबियाई सुरक्षा मुख्यालय और उससे जुड़ी इमारतों को त्रिपोली में काफ़ी नुक़सान पहुँचा है. शायद इसके ज़रिए कोशिश शहर को बचाने की लीबियाई फ़ौज की क्षमता को कम करना था.

नैटो देशों की सरकारों ने विद्रोहियों और उनके संगठन 'नेशनल ट्रांज़िशनल काउंसिल' में काफ़ी भरोसा जताया है.

ऐसी योजनाएँ बनाई गई हैं कि ग़द्दाफ़ी शासन के हटने के बाद लीबिया में सुरक्षा का सही ढंग से हस्तांतरण हो सके और किसी तरह का असमंजस न रहे.

मगर जिस तरह पिछले दिनों एक प्रमुख विद्रोही कमांडर की उनके ही पक्ष के लोगों ने हत्या कर दी उससे विद्रोही नेतृत्त्व के दावों की चमक फीकी हुई है.

कर्नल ग़द्दाफ़ी के शासन ने एक भय के सहारे देश को एकजुट रखा था. शासन के लिए अपनी प्रतिबद्धता के अलावा वहाँ कुछ और नहीं था.

मगर अब कर्नल ग़द्दाफ़ी के हटने के साथ ही ये डर हो गया है कि कहीं लीबियाई समाज कई हिस्सों में बँट न जाए. विद्रोही नेतृत्त्व की मुश्किलें देखा जाए तो दरअसल अब शुरू होंगी.

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