विरोध से सत्ता पलट तक का सफ़र

  • 22 अगस्त 2011
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Image caption विद्रोही सेना के त्रिपोली में घुसने को लेकर जश्न का माहौल.

लीबिया में विद्रोही राजधानी त्रिपोली में प्रवेश कर गए हैं जहां उनका स्वागत किया गया. ख़बर है कि कर्नल ग़द्दाफ़ी के दो बेटों को गिरफ़्तार कर लिया गया है.

लीबिया में कर्नल ग़द्दाफ़ी के 42-साल के शासन के ख़िलाफ़ विद्रोह पांच महीने पहले फ़रवरी के मध्य में शुरू हुआ जो बाद में लीबिया के नेता के वफ़ादार सैनिकों और विद्रोही दस्तों के बीच क्षेत्राधिकार में तब्दील हो गया.

इसके पहले उत्तरी अफ़्रीका के दो देशों - ट्यूनिशिया और मिस्र में सत्ता विरोधी आंदोलन शुरू हो चुके थे. लीबिया में सरकार ने एक महिला मानवाधिकार कार्यकर्ता को गिरफ़्तार कर लिया जिसके विरोध ने बाद में आंदोलन की शक्ल अख़्तियार कर ली.

सरकार के विरोध में सबसे ज़्यादा विरोध बेनग़ाज़ी शहर में देखा गया जो बाद में विद्रोह के केंद्र के तौर पर स्थापित हुआ.

विदेशी नागरिक

वहां रह रहे हज़ारों विदेशी नागरिकों को लीबिया छोड़ना पड़ा जबकि कई देशों ने अपने नागरिकों को वापस बुला लिया.

फ़रवरी के आख़िरी हफ़्तों और मार्च के शुरू के दिनों में विद्रोहियों ने बेनग़ाज़ी को अपना केंद्र बनाकर पश्चिमी शहरों अज़दाबिया और तोबरूक पर हमले किए जिसका जवाब सरकारी फ़ौजों ने ज़मीनी और हवाई हमलों से दिया.

कर्नल ग़द्दाफ़ी ने सरकारी टीवी पर दिए गए भाषण में कहा कि "वो आख़िर तक लड़ेंगे."

उन्होंने कहा, "हम लाखों लोगों को हथियार थमा देंगे और दूसरा वियतनाम शुरू हो जाएगा."

मार्च में सरकारी फ़ौजों को सफ़लता मिली और उन्होंने विद्रोहियों को बिन जवाद, रास लनूफ़ और ब्रेगा जैसे शहरों से तटीय इलाकों में खदेड़ दिया.

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Image caption शनिवार को विद्रोहियों को त्रिपोली में मात खानी पड़ी थी.

इस बीच विद्रोहियों के पास भी टैंक और हेलीकॉप्टर पहुंच चुके थे और ज़ाविया जैसे शहरों में दोनों पक्षों के बीच ख़ूनी लड़ाइयां हुईं.

राजधानी त्रिपोली के पश्चिम में स्थित ज़ाविया के एक नागरिक का कहना था कि वो नहीं बता सकते कि कितने लोग हमले में मारे गए है, "शहर को जैसे राख में मिला दिया गया है."

हवाई हमले

इन हमलों के बाद ही संयुक्त राष्ट्र ने आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक 'नो-फ़्लाई ज़ोन' यानि उड़ान निषेध क्षेत्र की योजना का समर्थन किया.

संयुक्त राष्ट्र के एक प्रस्ताव के भीतर हमले की योजना भी तैयार की गई लेकिन कर्नल ग़द्दाफ़ी की सरकार ने युद्ध विराम की घोषणा कर दी हालांकि उनकी सेना ने लड़ाई जारी रखी.

इससे नाराज़ अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने लीबिया पर हवाई हमले शुरू कर दिए सबसे पहला हवाई हमला फ्रांस की तरफ़ से किया गया.

फ्रांस के राष्ट्रपति निकोला सारकोज़ी ने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा के लिए जो भी जरूरी है सब किया जाएगा.

बाद में अमरीका और ब्रिटेन भी हवाई हमलों में शामिल हो गए जिसकी वजह से लीबिया की सेना की हवाई क्षमता लगभग नष्ट हो गई लेकिन कर्नल ग़द्दाफ़ी ने एक लंबी लड़ाई की घोषणा की.

मार्च के तीसरे सप्ताह में लीबिया पर और भी हवाई हमले किए गए जिसमें सरकारी फ़ौजों को काफी नुकसान उठाना पड़ा साथ ही कर्नल गद्दाफ़ी के निवास स्थान के परिसर को भी नुकसान हुआ.

नैटो

लड़ाई की कमान नैटो के हाथों चली गई.

सहायता पहुंचाने वाली एजेंसियों का कहना था कि आम नागरिकों को भारी दिक्क़तों का सामना करना पड़ रहा है.

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Image caption लड़ाई एक समय गतिरोध की स्थिति में पहुंच गई थी.

पिछले पांच महीनों में लड़ाई में एक गतिरोध की स्थिति बनी रही है जिसमें दोनों पक्ष कुछ इलाक़ों पर कब्ज़ा करते रहे और उन्हें कुछ समय के बाद वो खाली करना पड़ा.

इसी दौरान कर्नल ग़द्दाफ़ी को एक बड़ा निजी आघात सहना पड़ा जब उनके परिसर पर हुए एक हमले में उनके एक बेटे और तीन पोतों की मौत हो गई.

अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ने मानवता के विरूद्घ अपराध के लिए लीबिया के नेता, उनके बेटे और ख़ुफ़िया विभाग के मुखिया की गिरफ्तारी के हुक्म जारी किए हैं.

कुछ देशों ने विद्रोही गुट को देश की सही सरकार के तौर पर मान्यता भी दे दी.

चंद दिनों पहले पूरी योजना के साथ विद्रोहियों ने राजधानी त्रिपोली पर दो-तरफ़ा हमला किया, हालांकि शनिवार रात को किए गए हमलें में उन्हें कुछ नुकसान उठाना पड़ा लेकिन फिर दूसरे दिन फिर से किया गया आक्रमण लगता है महीनों से चल रही लड़ाई का अंत है.

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