मुरुगन की बेटी का दर्द

Image caption मुरुगन और नलिनी ने 1991 में गिरफ़्तार होने के कुछ समय बाद हरिता को जन्म दिया था

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की मई 1991 में हुई हत्या ने देश को सन्न कर दिया था लेकिन ये घटना उस युवती के लिए भी एक निजी त्रासदी बन गई थी जिसका अभी जन्म भी नहीं हुआ था.

हरिता मुरुगन के माता-पिता को राजीव गांधी की हत्या के कुछ ही दिनों बाद गिरफ़्तार कर लिया गया था और उन्हें साज़िश को अंजाम देने का दोषी ठहराया गया था.

मुरुगन और नलिनी की बेटी हरिता का जन्म जनवरी 1992 में जेल में हुआ था.

जन्म के बाद से अब तक वो अपने माता-पिता से केवल एक बार ही मिल सकी है.

जन्म के बाद हरिता को श्रीलंका ले जाया गया जहां उसकी दादी ने उसकी परवरिश की.

अब वो लंदन में मेडिकल की पढ़ाई कर रही है.

थोड़ी राहत

हरिता की मां नलिनी को अपनी बाक़ी की ज़िंदगी जेल में ही बितानी है क्योंकि उन्हें दी गई फांसी की सज़ा को दस साल पहले क्षमा याचिका दायर करने के बाद आजीवन कारावास में बदल दिया गया था.

लेकिन उनके पिता मुरुगन उन तीन लोगों में शामिल हैं जिन्हें फांसी की सज़ा सुनाई गई है.

Image caption भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 1991 में चुनाव रैली के दौरान श्रीपेरंबदूर में हत्या हो गई थी

आने वाले नौ सितंबर को उन्हें फांसी दी जानी थी लेकिन मद्रास उच्च न्यायालय ने इसे आठ हफ़्तों के लिए टाल दिया है.

हरिता ने ये ख़बर सुनने के बाद बीबीसी से कहा, ''मैं बेहद ख़ुश हूं. मैं उन सभी लोगों का शुक्रिया अदा करना चाहती हूँ जिन्होंने उनके लिए आवाज़ उठाई.''

राजीव गांधी की हत्या एक चुनावी रैली के दौरान तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक महिला आत्मघाती हमलावर ने की थी.

ऐसा माना जाता है कि श्रीलंका में एलटीटीई के ख़िलाफ़ भारतीय सैनिकों की तैनाती के 1987 के फ़ैसले का बदला लेने के लिए उनकी हत्या करवा दी गई थी.

अंतहीन दुख

फांसी की कार्रवाई आठ हफ़्ते तक टलने के फ़ैसले के बावजूद हरिता के जीवन में गहरा दुख है.

वो नहीं चाहतीं कि किसी की भी ज़िंदगी उनकी तरह हो.

उन्होंने कहा, ''मैं जेल में पैदा हुई. मैं अपने माता-पिता से चिट्ठियों के ज़रिए बात करती हूं. वे हमेशा कहते हैं कि वे मेरे लिए ही जी रहे हैं. मैं हर रोज़ उनकी कमी महसूस करती हूं. इस बात से थोड़ा सुक़ून मिलता है और जीने की प्रेरणा मिलती है कि वो जीवित हैं लेकिन मुझसे ये सुक़ून भी छिन सकता है.''

हरिता अपने माता-पिता से 2005 में मिली थी और उनका कहना है कि वे निर्दोष हैं.

वो कहती हैं, ''बचपन में मुझे मेरे माता-पिता की कोई ख़बर नहीं थी लेकिन जब मैं उनसे मिली तब ये अहसास हुआ कि मैंने क्या खोया है. उन्होंने मुझसे पढ़ाई में कड़ी मेहनत करने को कहा.''

"उन्होंने ज़िंदगी का बड़ा हिस्सा जेल में बिता दिया है. मैं कड़ी मेहनत कर उन्हें खुशी देना चाहती हूं. मैं चाहती हूं कि वे अपनी ज़िंदगी की कमी मेरे ज़रिए पूरी करें. मेरी मां हमेशा कहती है कि मुझे दूसरों की मदद करनी चाहिए.''

"जब मैंने उन्हें बताया कि मुझे मेडिकल स्कूल में दाख़िला मिल गया है तो वे बहुत ख़ुश हुए.ये ख़ुशी ज़्यादा दिन नहीं टिकने वाली. मुझे लगता है कि मैं बहुत बदक़िस्मत लड़की हूं.''

अंतिम विदाई

हरिता ने भारत की यात्रा के लिए दरख़्वास्त दे रखी है ताकि वो अपने पिता को अंतिम विदाई दे सकें. लेकिन उन्हें डर है कि समय पर वीज़ा नहीं मिल सकेगा.

लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने उन्हें बताया है कि उन्हें वीज़ा मिलने में कमसे कम 15 दिन लग सकते हैं.

अपने माता-पिता से मिलने के लिए उत्सुक हरिता ने तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता से भी एक भावुक अपील की है - ''अगर आप उन्हें रिहा करना नहीं चाहतीं तो कृपया उन्हें फांसी न दें.''

तमिलनाडु में राजीव गांधी की हत्या के षडयंत्र के तीनों दोषियों मुरुगन, सांथन और पेरारिवेलन की सज़ा कम करवाने को लेकर राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ रहा है.

लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि क़ानूनी रूप से उन्हें क्षमा दिए जाने की संभावना काफ़ी कम है. इनमें से मुरुगन और सांथन श्रीलंका के हैं जबकि पेरारिवेलन भारतीय तमिल हैं.

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