विद्रोही अब गद्दाफ़ी के शहर की ओर

  • 25 अगस्त 2011
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Image caption त्रिपोली में कर्नल गद्दाफ़ी के परिसर पर विद्रोहियों ने कब्ज़ा कर लिया है

लीबिया की राजधानी त्रिपोली में विद्रोहियों के प्रवेश के चार दिन बाद भी गोलीबारी की छिटपुट आवाज़ें सुनाई दे रही हैं.

बीबीसी के एक संवाददाता के अनुसार शहर के कई हिस्सों में विद्रोहियों और गद्दाफ़ी समर्थकों के बीच संघर्ष हो रहा है.एक विद्रोही ने बताया है कि शहर की मुख्य जेल के पास भारी लड़ाई हो रही है.

वैसे त्रिपोली में विद्रोहियों ने कर्नल गद्दाफ़ी के परिसर बाब अल अज़ीज़िया पर नियंत्रण कर लिया है.

फ़िलहाल बताया जा रहा है कि विद्रोही पूर्वी शहर सीयर्त की ओर बढ़ रहे हैं जो कर्नल गद्दाफ़ी का जन्मस्थान है और जहाँ गद्दाफ़ी समर्थकों का नियंत्रण है. दक्षिण में एक और शहर सबहा भी उनके नियंत्रण में है.

ऐसी ख़बरें हैं कि त्रिपोली से सीयर्त के रास्ते पर कोई एक हज़ार गद्दाफ़ी समर्थक जमा हैं और विद्रोहियों का सामना कर रहे हैं. सीयर्त से पहले एक और शहर बिन जवाद में भी गद्दाफ़ी समर्थक डटे हुए हैं.

विद्रोहियों के एक कमांडर फ़ॉज़ी बुकातिफ़ ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा,"हमें आश्चर्य है कि गद्दाफ़ी की सेनाएँ अभी भी लड़ रही हैं. हमें लगा त्रिपोली के पतन के बाद वे समर्पण कर देंगी".

इस बीच त्रिपोली में ज़रूरी सामानों और बिजली की कमी के कारण मानवीय संकट की स्थिति की चेतावनियाँ भी दी जा रही हैं.

राहत संस्था मेडिसिन्स सॉं फ्रांतिय के एक इमर्जेंसी कोऑर्डिनेटर जोनाथन व्हिटल ने बताया,"अस्पतालों को मदद की सख्त ज़रूरत है. अगर ज़रूरी आपूर्तियाँ ना पहुँचीं तो मरीज़ मारे जाएँगे. अस्पताल पूरी तरह भरे हुए हैं, अगर उन्हें ऑक्सीजन ना मिला, इलाज करनेवाले सही लोग नहीं मिले, तो मौतों की संख्या बढ़ेगी."

गद्दाफ़ी पर इनाम

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Image caption विपक्षी नेताओं ने कर्नल गद्दाफ़ी को ज़िन्दा या मुर्दा पकड़ने के लिए इनाम का एलान किया है

लीबिया के विपक्षी नेताओं ने कर्नल गद्दाफ़ी को मारने या पकड़ने के लिए 17 लाख डॉलर का इनाम देने की घोषणा की है.

विपक्षी नेतृत्व अभी पूर्वी शहर बेनगाज़ी में ही डटा है और त्रिपोली की लड़ाई के थमने का इंतज़ार कर रहा है.

साथ-साथ वे नगद पैसे के इंतज़ाम का भी प्रयास कर रहे हैं ताकि सत्ता हाथ में आने पर वे ज़रूरी व्यवस्थाएँ कर सकें.

इस दिशा में अंतरराष्ट्रीय समर्थन के लिए लीबियाई विपक्षी नेता विदेशों का भी दौरा कर रहे हैं.

लीबिया की राष्ट्रीय परिवर्तनशीनल परिषद के प्रधानमंत्री महमूद जिबरिल ने आज इटली के प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी से मुलाक़ात की जिसके बाद इटली ने लीबिया की ज़ब्त संपत्तियों को विद्रोहियों को देने की घोषणा की.

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन

महमूद जिबरिल ने इससे पहले पेरिस में फ्रांस के राष्ट्रपति निकोला सारकोज़ी से भी मुलाक़ात की.

सारकोज़ी ने उनसे कहा कि फ्रांस और ब्रिटेन अगले सप्ताह एक साझा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन करेंगे जिसमें लीबिया को मदद देने के बारे में चर्चा होगी.

पेरिस में एक सितंबर को होनेवाले सम्मेलन में 30 से अधिक देशों के हिस्सा लेने की संभावना है. लीबियाई विपक्ष ढाई अरब डॉलर की सहायता और लीबिया की ज़ब्त संपत्तियाँ लेने का प्रयास कर रहे हैं.

फ्रांस, ब्रिटेन और अमरीका मिलकर संयुक्त राष्ट्र के एक प्रस्ताव पर भी काम कर रहे हैं जिसपर इस सप्ताह मतदान हो सकता है.इस बीच अरब लीग ने विद्रोहियों को लीबिया की वैध सरकार के रूप में मान्यता दे दी है.

अरब लीग ने इससे पहले कर्नल गद्दाफ़ी की सत्ता को संगठन से निलंबित कर दिया था.

गद्दाफ़ी के दो पूर्व सहयोगियों चाड और बुर्किना फ़ासो ने भी लीबियाई विपक्ष को मान्यता दे दी है.

हालाँकि लीबिया के पूर्व सहयोगी दक्षिण अफ़्रीका का रूख़ अलग है – उसने अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय से लीबिया में मानवाधिकारों के हनन के लिए नेटो की जाँच करने की माँग की है.

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