यूएन में लीबियाई संपत्ति को लेकर समझौता

लीबिया में विद्रोही
Image caption विद्रोही अब गद्दाफ़ी के शहर सिर्ते की ओर बढ़ रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र के कूटनीतिज्ञों का कहना है कि लीबिया के डेढ अरब अमरीकी डॉलर धन पर लगे प्रतिबंध को हटाया जा रहा है ताकि इसका इस्तेमाल मानवीय कार्यों के लिए किया जा सके.

इससे पहले दक्षिण अफ़्रीका ने संयुक्त राष्ट्र की इस कोशिश का ये कहते हुए विरोध किया था कि ये धन लीबियाई विद्रोहियों के हाथ लग सकता है. अमरीका ने इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र में वोट डलवाने की योजना बनाई थी लेकिन आख़िर वक़्त में दक्षिण अफ़्रीका ने अपनी आपत्ति वापस ले ली.

इसके अलावा इटली ने भी पचास करोड़ अमरीका डॉलर के लीबियाई धन को रिलीज़ करने का फ़ैसला किया ताकि वहां कि ट्रांज़िशनल नेशनल काउंसिल अपने कर्मचारियों का वेतन दे सके और तेल संसाधनों की रक्षा कर सके.

त्रिपोली में जंग जारी

उधर लीबिया की राजधानी त्रिपोली के कुछ हिस्सों में घमासान जंग जारी है. हालांकि इस समय शहर का अधिकतर हिस्सा विद्रोहियों के कब्ज़े में है.

विद्रोही सेना कर्नल गद्दाफ़ी के शहर सिर्ते में प्रवेश की कोशिश कर रही है लेकिन वहां से ख़बर है कि गद्दाफ़ी के वफ़ादार सैनिकों ने उन्हें पीछे धकेल दिया है.

बीबीसी ने गद्दाफ़ी के सेना द्वारा की गई कथित यातनाओं और हत्याओं के साक्ष्य देखे हैं.

इसबीच गद्दाफ़ी ने एक संदेश में लीबियाई लोगों से विद्रोहियों से लड़ने और उन्हें तबाह करने का आहवान किया है.

सिर्ते के लोगों के नाम इस संदेश को एक गद्दाफ़ी समर्थक टीवी चैनल पर सुनाया गया है

गद्दाफ़ी ने अपने संदेश में कहा है, "लीबिया लीबियाई लोगों का देश है ना कि एजेंटो,साम्राज्यवादियों,फ़्रांस,सारकोज़ी या इटली का. त्रिपोली तुम्हारा शहर है, उनका नहीं जो नैटो के भरोसे हैं."

'यातनाएं और हत्या'

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Image caption त्रिपोली के एक इलाके में 17 विद्रोहियों के शव मिले हैं जिनपर यातनाओं की निशानियां हैं.

गुरुवार को त्रिपोली के अबु सलीम इलाक़े में गोलीबारी होती रही. ये इलाक़ा गद्दाफ़ी की बदनाम जेल के क़रीब है.

इसके अलावा जिस होटल में विदेशी पत्रकार ठहरे हैं वहां भी गोलीबारी हुई है.

गद्दाफ़ी के बाब अल-अज़ीज़िया कंपाउंड से भी बीच-बीच गोलियों की आवाज़ें सुनी गई हैं.

बीबीसी संवाददाता ने त्रिपोली के मितिगा इलाके़ में एक अस्पताल का दौरा किया है जहां 17 विद्रोही लड़ाकों की लाशें लाई गई हैं.

एक प्रत्यक्षदर्शी ने बीबीसी को बताया है कि गद्दाफ़ी समर्थकों ने अपने कंपाउंड को छोड़ते वक्त विद्रोहियों को गोलियां से छलनी कर दिया था.

इस अस्पताल में काम कर रहे एक ब्रितानी डॉक्टर होएज़ ज़ैटान ने बताया कि मृतकों में से आधों को सिर के पिछली तरफ़ गोली लगी है. बाक़ियों के शरीर के अंगों को क्षत-विक्षत किया गया है.

डॉक्टर ने बताया कि इन शवों का युद्ध अपराध ट्राइब्यूनल के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए निरिक्षण किया जा चुका है.

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