इतिहास के पन्नों से...

1979 में एक बम धमाके में लॉर्ड लुईस माउंटबैटन की मौत हुई थी जबकि 1950 में बीबीसी ने ब्रिटेन के बाहर से दुनिया में पहली बार टेलिविज़न का लाईव प्रसारण किया था.

1979: बम धमाके में लॉर्ड लुईस माउंटबैटन की मौत

आज ही के दिन आयरलैंड में एक निजी नाव पर हुए बम धमाके में ब्रिटेन की महारानी के चचेरे भाई लॉर्ड लुईस माउंटबैटन की हत्या कर दी गई थी.

Image caption धमाके के कुछ ही देर बाद लॉर्ड माउंटबैटन ने दम तोड़ दिया

इस भीषण धमाके में लॉर्ड माउंटबैटन के पोते निकोलस और एक नाव चालक की भी मृत्यु हुई थी.

आईआरए संगठन ने दुर्घटना के तुरंत बाद इस हमले की ज़िम्मेदारी ली थी.

निजी नाव पर हुए इस हमले के कुछ ही देर पहले आयरलैंड की सीमा पर घात लगा कर किए गए हमले में 18 सैनिकों की भी हत्या की गई थी.

79 वर्षीय लॉर्ड माउंटबैटन और उनका परिवार आमतौर से गर्मियों की छुट्टियाँ बिताने के लिए उत्तर-पश्चिम आयरलैंड में स्थित अपने महल में जाया करते थे.

धमाके के समय लॉर्ड लुईस माउंटबैटन का परिवार उनकी निजी नाव 'शैडो 5' पर सवार थे और मछली पकड़ने के शौक़ को पूरा कर रहे थे.

दुर्घटना के बाद एक चश्मदीद ने बताया कि बम धमाका इतना ज़बरदस्त था कि नाव के टुकड़े हो गए और उसपर सवार सभी लोग समुद्र में गिर गए.

पास के मछुआरों ने मदद करने की भरपूर कोशिश की और लॉर्ड माउंटबैटन को पानी से बाहर निकाला था.

हालांकि वे इतने ज़ख़्मी हो चुके थे कि धमाके के कुछ ही देर बाद लॉर्ड माउंटबैटन ने दम तोड़ दिया.

1950: बीबीसी ने ब्रिटेन के बाहर से दुनिया में पहली बार टेलिविज़न का सीधा प्रसारण किया.

टेलिविज़न की दुनिया के इतिहास में आज ही के दिन बीबीसी ने पहली बार स्थल-आधारित सीधा प्रसारण किया.

Image caption प्रसारण की योजना बनाने के लिए दो महीने से भी ज़्यादा का समय लगा.

दो घंटे का ये प्रसारण इंग्लिश चैनल के दूसरे छोर यानी फ्रांस से किया गया.

दरअसल ये कार्यकम इंग्लैंड से फ्रांस तक भेजे गए दुनिया के पहले टेलीग्राम की शताब्दी मनाने के लिए आयोजित किया गया था.

टेलिविज़न पर रिचर्ड डिमब्लाबय और एलन अडैर ने इस सीधे प्रसारण के दौरान कैमरे के सामने कमेंट्री की.

इस ऐतिहासिक प्रसारण की योजना बनाने के लिए दो महीने से भी ज़्यादा का समय लगा और ये इसलिए संभव हो सका क्योंकि इस समय तक छोटे टेलिविज़न के लिए रेडियो लिंक की तकनीकि का विकास हो चुका था.

इससे पहले सीधे प्रसारण का दायरा सिर्फ 25 मील यानि 40 किलोमीटर तक ही था.

इस सीधे प्रसारण के लिए पांच छोटे रेडियो लिंक स्टेशन बनाए गए थे ताकि वो सिग्नल को ग्रहण कर आगे प्रसारित कर सकें.

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