लीबिया में संघर्ष और प्रतिरोध जारी

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Image caption विद्रोही सिरते पर चढ़ाई के लिए पहले से वहां हथियार जमा करते रहे

लीबिया की राजधानी त्रिपोली में विद्रोहियों का नियंत्रण है, लेकिन सिरते में उन्हें भारी प्रतिरोध झेलना पड़ रहा है.

लीबिया की राजधानी त्रिपोली के ज्यादातार हिस्सों पर विद्रोहियों का नियंत्रण है, लेकिन भारी तनाव के संकेत अब भी देखे जा सकते हैं.

सड़कों पर हज़ारों सशस्त्र विद्रोही सैनिकों की गश्त के बीच वाहनों की आवाजाही भी दिखने लगी है, लेकिन पुलिस और नागारिक प्रशासन की मौजूदगी अभी नहीं दिखती.

त्रिपोली शहर पर अपना क़ब्ज़ा मज़बूत करने के लिए विद्रोहियों ने अपनी राजधानी बेनग़ाज़ी से त्रिपोली स्थानांतरित करने की घोषणा कर दी है.

लीबिया के विद्रोहियों की कैबिनेट में तेल और वित्त मामलों के मंत्री अली तहूनी ने त्रिपोली में आयोजित विद्रोहियों के पहले संवाददाता सम्मेलन में ये जानकारी दी.

फिलहाल त्रिपोली के केंद्र में शांति बनी हुई है लेकिन अतंर्राष्ट्रीय हवाई अडडे के आस पास दोनों पक्षों में लड़ाई जारी है.

इससे पहले बेनगाज़ी में टेलिविज़न पर विद्रोहियो के सैन्य प्रवक्ता अहमद बानी ने लीबिया की जनता से अपील की कि वो देश के हवाई ठिकानों और हथियार भंडारों की गंभीरता से रक्षा करें.

सिरते मे प्रतिरोध

लीबिया में विद्रोही अब कर्नल गद्दाफ़ी के गृहनगर सिरते पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं मगर उन्हें कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है.

ग़द्दाफ़ी के अंतिम गढ़ सिरते से क़रीब 60 मील दूर विद्रोही रॉकेट फ़ायर कर रहे हैं.

सिरते के बारे में यह माना जाता है कि ग़द्दाफ़ी के सबसे ज़्यादा सैनिक वहाँ मौजूद हैं.

लेकिन दूसरी तरफ़ विद्रोही बिन जवाद पर भी चढ़ाई किए हुए हैं और सिरते से पहले बिन जवाद पर कब्ज़ा करने की मंशा लेकर वे आगे बढ़ रहे हैं.

पिछले 6 महीनों में 3 बार बिनजवाद पर कब्ज़े की विद्रोहियों की कोशिशें नाकाम रहीं लेकिन इस बार फतेह की उम्मीद के साथ विद्रोहियों ने ये लड़ाई शुरू की है.

फतेह की उम्मीद इसलिए क्योंकि काफ़ी पहले से विद्रोही धीरे धीरे वहां टैंक, रॉकेट लॉंचर और हथियार भेजते रहे हैं.

एक विद्रोही कमांडर का कहना था कि सिरते के सीमावर्ती इलाके में पहुंचे विद्रोहियों को फिलहाल ग़द्दाफ़ी समर्थक उलझा कर रखना चाह्ते हैं जिससे सिरते में उनके सैनिक प्रतिरक्षा की बेहतर तैयारी कर सकें.

संपत्ति से रोक हटी

उधर संयुक्त राष्ट्र में लीबिया पर बात कर रहे कूटनीतिज्ञ लीबिया की लगभग डेढ़ अरब डॉलर की संपत्ति पर लगी रोक हटाने के लिए राज़ी हो गए हैं.

इसी बीच संयुक्त राष्ट्र की हरी झंडी मिलने के बाद दक्षिण अफ्रीका ने सीबियाई संपत्ति पर लगी रोक हटने का स्वागत किया है और इटली ने भी लीबिया की संपत्ति विद्रोही संगठन नैशनल ट्रांज़िशनल काउंसिल को देने की घोषणा कर दी है.

पहले इस क़दम का विरोध करने वाले दक्षिण अफ़्रीका ने भी अब रज़ामंदी दे है.

दक्षिण अफ़्रीका ने पहले ये चिंता जताई थी कि ये धन विद्रोहियों के हाथों में जाएगा और हथियारों के लिए इस्तमाल होगा.

लेकिन महमूद जिबरिल की अपील के बाद दक्षिण अफ़्रीका ने संतुष्टि जताई है कि ये धन मानवीय सहायता के कार्यों में लगाया जाएगा.

इटली ने लीबिया के 50 करोड़ डॉलर की रकम लीबिया की नैशनल ट्रांज़िशनल काउंसिल को देने की घोषणा कर दी है.

इटली के विदेशमंत्री फ्रांको फ्रातिनी ने बीबीसी को बताया, "हमने इसलिए ये फैसला किया है क्योंकि हम समझते हैं कि लीबिया के लोगों को अपनी रोज़मर्रा के जीवन के लिए ज़रूरी चीज़ें चाहिएं. मानवीय सहायता चाहिए और ये संयुक्त राष्ट्र के लीबिया की संपत्ति से रोक हटाए जाने से पहले नहीं हो सकता था."

नैशनल ट्रांज़िशनल काउंसिल के प्रमुख महमूद जिबरिल ने भी इससे पहले अपील की थी कि लीबिया की नई कार्यवाहक सरकार को देश चलाने के लिए पैसे की सख़्त ज़रूरत है.

उनका कहना था, "देश का पूरा ढांचा बिगड़ चुका है ऊर्जा केंद्र ठप पड़े हैं और लोगों की उम्मीदें काफी ऊंची हैं, लेकिन लीबिया का पैसा लीबिया के पास पहुंचे बगैर हम लोगों को बेहतर सेवा नहीं दे पाएंगे."

लीबिया से अपील

संयुक्त राष्ट्र ने लीबिया संघर्ष में शामिल सभी पक्षों से अपील की है कि हिंसा और बदले की कार्रवाई के कुचक्र में न पड़ें.

संयुक्त राष्ट्र की जांच में ये सामने आया है दोनों ही पक्षों की ओर से मानवाधिकारों का हनन हुआ है.

इससे पहले विद्रोहियों के समूह नेशनल ट्रांज़िशन काउंसिल के प्रमुख मुस्तफ़ा अब्दुल जलील ने विद्रोहियों से अपील की थी कि वे गद्दाफ़ी के वफ़ादार सैनिकों पर बदला लेने की मंशा से हमले न करें.

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