'पचास हज़ार क़ैदियों का सुराग नहीं'

  • 28 अगस्त 2011
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लीबिया में विद्रोही नेताओं का कहना है कि वो कर्नल गद्दाफ़ी के शासन में पिछले कुछ महीनों में हिरासत में लिए गए 50 हज़ार से ज़्यादा क़ैदियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं.

उनका कहना है कि ये क़ैदी राजधानी त्रिपोली के गुप्त ठिकानों या बंकरों में बंधक हो सकते हैं.

विद्रोही नेताओं के मुताबिक़ अब तक केवल 11 हज़ार कैदियों के बारे में सूचना मिल पाई है, जबकि 60 हज़ार से ज़्यादा लोगों को क़ैद किया गया था.

विद्रोहियों ने लोगों से अपील की है कि वो इन बंकरों या छिपे हुए ठिकानों के बारे में जो भी जानकारी उपलब्ध हो वह दें.

'लीबिया में हैं गद्दाफ़ी'

इससे पहले कर्नल गद्दाफ़ी के प्रवक्ता मूसा इब्राहिम ने कहा था कि वे अस्थायी सरकार बनाने के लिए विद्रोहियों के साथ मध्यस्थता करने के लिए तैयार हैं.

एक व्यक्ति ने एक समाचार एजेंसी को फ़ोन करके यह बात कही और माना जा रहा है कि ये मूसा इब्राहिम हैं.

उन्होंने कहा कि गद्दाफ़ी लीबिया में हैं. हालांकि विद्रोहियों ने बातचीत की पेशकश ठुकरा दी है. समाचार एजेंसी के मुताबिक़ मूसा इब्राहिम को उनकी आवाज़ से पहचाना गया.

राजधानी त्रिपोली समेत लीबिया के ज़्यादातर हिस्सों में विद्रोहियों का कब्ज़ा है. विद्रोहियों का मानना है कि गद्दाफ़ी अब भी इलाक़े में छिपे हुए हैं.

बीबीसी संवाददाता के मुताबिक बातचीत की ताज़ा पेशकश को गद्दाफ़ी की भ्रमित मनस्थिति के एक और संकेत के तौर पर देखा जाएगा.

इस बीच लीबिया में विद्रोहियों का कहना है कि त्रिपोली में ईंधन और पानी सप्लाई जल्द शुरु हो जाएगी.आशंका जताई जा रही है कि शायद त्रिपोली में गद्दाफ़ी के सैनिकों ने पानी को विषैला कर दिया हो.

हत्या का आरोप

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उधर लीबिया में सामूहिक हत्या के मामलों के और सुबूत मिल रहे हैं. एक सैन्य अड्डे के पास वेयरहाइस में 50 लोगों के जले हुए शव मिले हैं.

सलाह अल-दिन ज़िले के नागरिकों के मुताबिक ये उन लोगों के शव हैं जिन्हें गद्दाफ़ी के बेटे खामिस की ब्रिगेड के सदस्यों ने मार डाला था.

ह्मूमन राइटस वॉच ने कहा है कि उसके पास सुबूत है कि गद्दाफ़ी समर्थक सैनिकों ने कम से कम 17 क़ैदियों की हत्या कर दी और संदिग्ध परिस्थितियों में कई लोगों को मार डाला.

शुक्रवार को त्रिपोली के अबू सलीम ज़िले में एक अस्पताल के पास 200 लोगों के शव मिले थे जो सड़ने शुरु हो चुके थे. लड़ाई शुरु होने के बाद इस अस्पताल के डॉक्टर और नर्स वहाँ से भाग गए थे जबकि ज़ख्मी लोग वहीं छूट गए थे.

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