गद्दाफ़ी से ख़तरा बरक़रार: विद्रोही

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लीबिया में विद्रोहियों की राष्ट्रीय अंतरिम परिषद ने अंतरराष्ट्रीय सेनाओ से अनुरोध किया है कि वे अपना सैन्य समर्थन बनाए रखें क्योंकि कर्नल गद्दाफ़ी से ख़तरा अब भी बना हुआ है.

ग़ौरतलब है कि लीबिया की राजधानी त्रिपोली में बेनगाज़ी से एक जहाज़ पहुँचा है जिसमें सैकड़ों क़ैदी सवार हैं. इन्हें लीबिया की विभिन्न जेलों से रिहा किया गया है. इनमें से कई को कर्नल गद्दाफ़ी के सैनिकों ने पिछले छह महीनों में पकड़ा था जबकि कुछ क़ैदी कई वर्षों से जेल में थे.

लीबिया: सैकड़ों बंदी लेकर जहाज़ त्रिपोली पहुँचा

उधर कर्नल गद्दाफ़ी के गढ़ और गृह नगर सियर्ट की ओर बढ़ रहे विद्रोहियों ने नुफ़ालिया नगर पर कब्ज़ा कर लिया है.

माना जा रहा है सियर्ट में कुछ हज़ार सैनिक मौजूद हैं जो अभी हथियार डालने को तैयार नहीं हैं.

गद्दाफ़ी: क्रांतिकारी से खलनायक तक

विद्रोहियों का कहना है कि वे ख़ून-ख़राबा नहीं चाहते हैं और उनकी इच्छा है कि क़बायली नेता समझौता करें और शांतिपूर्ण तरीके से हथियार डाल दें.

लेकिन फ़िलहाल उनके प्रयास नाकाम रहे हैं. विद्रोहियों के एक प्रवक्ता ने कहा है कि उन्हें अभी जानकारी नहीं है कि कर्नल गद्दाफ़ी वहाँ छिपे हुए हैं या नहीं.

'असली जीत तभी जब गद्दाफ़ी मिलें'

रक्षा से संबंधित नेताओं की एक बैठक को संबोधित करते हुए लीबियाई विद्रोहियों की राष्ट्रीय अंतरिम परिषद के अध्यक्ष मुस्तफ़ा अब्देल जलील ने कहा कि नैटो की सेनाओं को अपने अभियान जारी रखने चाहिए.

'लीबिया में 50 हज़ार क़ैदियों का सुरग नहीं'

बीबीसी के अरब मामलों को संपादक सिबेस्टियन उशेर के अनुसार, "कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं लेकिन गद्दाफ़ी का कहाँ हैं, इसका कुछ पता नहीं है. पता चला है कि विद्रोहियों ने कहा है कि उनकी जीत तभी होगी जब गद्दाफ़ी मिल जाएँगे."

उशेर के मुताबिक नैटो की सैन्य कार्रवाई ने विद्रोहियों की जीत में बड़ी भूमिका निभाई है.

सत्ता हस्तांतरण के लिए बातचीत के लिए तैयार हैं 'गद्दाफ़ी'

यही संदेश विद्रोहियों की अंतरिम परिषद के अध्यक्ष जलील के संबोधन से भी मिला है. उन्होंने कहा है कि कर्नल गद्दाफ़ी से अब भी बहुत बड़ा ख़तरा है और ये केवल लीबिया के लिए ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए ख़तरा है.

नैटो के सैन्य कमांडरों का कहना है कि इस अभियान को अंतिम दौर तक पहुँचाने के बारे में वे प्रतिबद्ध हैं.

नैटो को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओर से इस अभियान के लिए सितंबर 27 तक का समय मिला हुआ है.

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