मुसलमानों का भेदभाव का आरोप

  • 30 अगस्त 2011

अमरीका में रह रहे आधे से ज़्यादा मुसलमानों को लगता है कि सरकार की चरमपंथ-निरोधी नीतियों की आड़ में उनके साथ भेद-भाव किया जाता है. ऐसा पाया गया है प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वेक्षण में, जो कि एक स्वतंत्र शोध संस्था है.

हालांकि रिपोर्ट में ये भी सामने आया है कि अमरीकी मुसलमानों में बढ़ते विराग या चरमपंथ को बढ़ावा देने के संकेत नहीं दिखाई दिए हैं.

ग़ौरतलब है कि अमरीका में हुए भयावह 9/11 चरमपंथ हमले की दसवीं सालगिरह से पहले ये सर्वेक्षण किया गया है. इससे पहले 2007 में प्यू इंटरनेशनल ने ऐसा ही सर्वेक्षण किया था.

लेकिन चार साल बाद पाया गया है कि 2007 के मुकाबले 2011 में ज़्यादा मुसलमान अमरीका में सहज महसूस करते हैं.

प्यू रिसर्च सेंटर के विश्लेषक ग्रेग स्मिथ ने कहा, “इस्लामी चरमपंथ और कट्टरपंथ के बारे में वैश्विक सुर्ख़ियों और चर्चा के बावजूद हमारा सर्वेक्षण दिखाता है कि आज का अमरीकी मुसलमान समुदाय मुख्यधारा का हिस्सा हैं.”

लेकिन जहां तक भेद-भाव की बात है, तो जहां 2007 में 40 प्रतिशत मुसलमानों का कहना था कि जांच के दौरान उन्हें ज़रूरत से ज़्यादा परेशान किया गया है, वहीं 2011 के सर्वेक्षण में पाया गया है कि 43 प्रतिशत मुसलमानों का कहना है कि उनके धर्म की वजह से उन्हें प्रताड़ित किया गया.

जब सर्वेक्षण के दौरान मुसलमानों से पूछा गया कि किस तरह से उन्हें परेशान किया जाता है, तो उन्होंने बताया कि लोग उन्हें शक़ भरी निगाहों से देखते हैं, उन्हें तरह-तरह के गंदे नाम लेकर बुलाते हैं और एयरपोर्ट या दूसरी जगहों पर जान बूझ कर उनकी ज़्यादा पुख़्ता जांच की जाती है.

लेकिन केवल छह प्रतिशत मुसलमानों ने कहा कि उनके साथ मार-पिटाई हुई और उन्हें धमकाया गया.

ओबामा से संतुष्ट सर्वेक्षण के मुख्य बिंदु 52 प्रतिशत मुसलमानों को लगता है कि चरमपंथ निरोधी नीतियों की आड़ में उनके साथ भेद-भाव किया जाता है.43 प्रतिशत मुसलमानों का कहना है कि उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर प्रताड़ना का सामना किया है.2007 में 40 प्रतिशत मुसलमानों ने प्रताड़ना का सामना किया.40 प्रतिशत अमरीकियों को लगता है कि अमरीकी मुसलमान चरमपंथ का समर्थन करते हैं.हालांकि अमरीकी मुसलमानों में बढ़ते विरोग या चरमपंथ को बढ़ावा देने के संकेत नहीं दिखाई देते.56 प्रतिशत अमरीकी मुसलमान अमरीकी प्रशासन के संतुष्ट.70 प्रतिशत अमरीकी मुसलमान ओबामा की डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थक.

दिलचस्प बात ये है कि जहां केवल 23 प्रतिशत अमरीकी जनता अमरीका में हो रही सामान्य गतिविधियों से संतुष्ट हैं, वहीं 56 प्रतिशत मुसलमान अमरीकी प्रशासन से खुश हैं.

क़रीब 70 प्रतिशत मुसलमान बराक ओबामा की डेमोक्रैटिक पार्टी का समर्थन करते हैं. शायद ये ही कारण हैं कि वे वहां की प्रशासन से संतुष्ट हैं.

43 प्रतिशत मुसलमानों का कहना है कि चरमपंथ से मुक़बला करने के अमरीकी प्रशासन के प्रयास खरे हैं, लेकिन 41 प्रतिशत मुसलमानों को इसके विपरीत लगता है.

चार साल पहले ज्यार्ज डब्ल्यू बुश के शासन के समय ये तस्वीर बेहद अलग थी.

जहां 55 प्रतिशत लोगों को बुश के प्रयास पुख़्ता नहीं लगते थे, वहीं केवल 26 प्रतिशत मुसलमानों को बुश की चरमपंथ-निरोधी नीतियों पर भरोसा था.

जहां 55 प्रतिशत मुसलमानों ने कहा कि 9/11 हमलों के बाद अमरीका में रहना मुश्किल हो गया है, वहीं 48 प्रतिशत का कहना है कि आम अमरीकी लोग उनके प्रति दोस्ताना व्यवहार रखते हैं.

2007 में जब ये सर्वेक्षण हुआ था, तब 53 प्रतिशत मुसलमानों ने कहा था कि 9/11 हमलों के बाद अमरीका में जीना दूभर हो गया है.

चरमपंथ को बढ़ावा

हालांकि आम अमरीकी जनता की सोच है कि अमरीका में रहने वाले मुसलमान वहां के समाज में घुल-मिल कर नहीं रहते, लेकिन सर्वेक्षण के मुताबिक़ ऐसा नहीं है.

56 प्रतिशत मुसलमानों का कहना है कि वे अमरीकी संस्कृति को अपनाना चाहते हैं, लेकिन केवल एक तिहाई अमरीकी नागरिकों को लगता है कि मुसलमान ऐसा चाहते हैं.

साथ ही 40 प्रतिशत अमरीकी नागरिकों को लगता है कि अमरीका में रहने वाले मुसलमान उग्रवाद का समर्थन करते हैं, लेकिन केवल 15 प्रतिशत अमरीकी मुसलमानों को ऐसा लगता है कि मुस्लिम समुदाय चरमपंथ के पक्ष में है.

प्यू रिसर्च सेंटर के मुताबिक़ अमरीका में 27.5 लाख मुसलमान रहते हैं.