अंतरराष्ट्रीय सैनिकों की तैनाती मंज़ूर नहीं

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लीबिया के अंतरिम नेतृत्व ने किसी भी तरह के अंतरराष्ट्रीय सैन्य बल को तैनात किए जाने के विचार को ठुकरा दिया है. ये जानकारी लीबिया में संयुक्त राष्ट्र के दूत इयन मार्टिन ने दी.

इयन मार्टिन ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र ने सैन्य पर्यवेक्षक तैनात करने पर विचार किया था लेकिन अब स्पष्ट है कि लीबिया के लोग ऐसा नहीं चाहते.

इससे पहले राष्ट्रीय अस्थाई परिषद के प्रमुख ने कहा था कि लीबिया को सुरक्षा के लिए बाहरी सहायता नहीं चाहिए.

ये ख़बर ऐसे समय आई है जब विद्रोही गद्दाफ़ी के गढ़ सिर्यट की ओर बढ़ रहे हैं. सिर्यट में सैनिकों को आत्मसमर्पण के लिए शनिवार तक का समय दिया गया है.

संयुक्त राष्ट्र में लीबिया के उप प्रतिनिधि इब्राहिम दबाशी ने बीबीसी से बातचीत में कहा है कि लीबिया में अनोखी स्थिति है. उनका कहना था, “लीबिया में गृह युद्ध नहीं है. ये दो पक्षों के बीच लड़ाई नहीं है. लोग ख़ुद को तानाशाही से बचा रहे हैं.”

पैसे की राहत

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा है कि लीबिया में कई चीज़ों की सख़्त ज़रूरत है. उन्होंने सुरक्षा परिषद से अपील की है कि वो पैसे को लेकर लीबिया पर नरमी दिखाए.

इससे पहलेसंयुक्त राष्ट्र ने ब्रिटेन के बैंकों में मौजूद क़रीब 1.86 अरब लीबियाई दिनार की राशि के इस्तेमाल पर लगाई गई रोक हटा ली और अब इस राशि को जारी किया जा सकेगा. जर्मनी को भी एक अरब यूरो की राशि जारी करने को कहा गया है.

पिछले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र ने अमरीका की 1.5 अरब डॉलर की लीबियाई राशि जारी करने का अनुरोध मान लिया था.

इस बीच कर्नल गद्दाफ़ी कहाँ हैं इस बारे में कुछ पता नहीं चल पाया है. हालांकि राष्ट्रीय अस्थाई परिषद के उप प्रमुख अली तारहूनी ने कहा है कि उन लोगों को अंदाज़ा है कि गद्दाफ़ी कहाँ है और उन्हें पकड़ लिया जाएगा.

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