यौन रोगों से 2500 को संक्रमित किया गया

सिफ़लिस
Image caption 2500 लोगों पर बिना अनुमति शोध हुआ

ग्वाटेमाला में स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि 1940 के दशक में वहाँ अमरीकी शोधकर्ताओं की ओर से हुए जानलेवा प्रयोग में लगभग 2500 लोगों को यौन रोगों से संक्रमित किया गया था.

इन ढाई हज़ार लोगों में क़ैदी, मानसिक रोगों से ग्रस्त लोग और अनाथ बच्चे शामिल थे.

इससे पहले जितने लोगों को संक्रमित करने की संख्या सामने आ रही थी, अब पता चला है कि वह पहले के मुकाबले में दोगुना है.

अमरीका में राष्ट्रपति की ओर से नियुक्त एक आयोग ने पाया था कि इस तरह के प्रयोग से कम से कम 83 लोगों की मौत हुई. इन लोगों को जान-बूझकर सिफ़लिस और गोनोरिया से संक्रमित किया गया.

ये आयोग ग्वाटेमाला में अमरीकी वैज्ञानिकों के काम की जाँच कर रहा है. अमरीका ने इन शोधों के लिए ग्वाटेमाला से पिछले साल ही माफ़ी मांगी थी.

इस शोध के क्रम में वैज्ञानिकों ने पेन्सिलिन ड्रग की जाँच के लिए वहाँ की अति संवेदनशील आबादी को जानबूझ कर संक्रमित किया.

नाज़ी डॉक्टरों पर अभियोग

ग़ौरतलब है कि ग्वाटेमाला के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया है कि ये अमरीकी प्रोग्राम उस समय चलाया जा रहा था जब जर्मनी के नाज़ी डॉक्टरों के ख़िलाफ़ युद्धापराधियों को प्रयोग के तौर पर टाइफ़स और मलेरिया से संक्रमित करने का अभियोग चल रहा था.

ये शोध अमरीकी जन स्वास्थ्य सेवा की ओर से वर्ष 1946 और 1948 के बीच हुए. पेन्सिलिन के प्रभाव की जाँच के लिए अमरीकी वैज्ञानिकों ने ऐसा किया.

शोध के बारे में इन लोगों से कोई सहमति नहीं ली गई.

ये काम काफ़ी गोपनीय तरीक़े से हुआ. इस मामले की जाँच कर रहे आयोग के कुछ सदस्यों ने इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया है.

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