लीबिया में लोकतंत्र का आश्वासन

  • 2 सितंबर 2011
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Image caption एनसीटी का कहा है कि लीबिया में अब परिस्थितियां पूरी तरह नियंत्रण में हैं.

लीबिया में राष्ट्रीय अंतरिम परिषद (एनसीटी) ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को विश्वास दिलाया है कि लीबिया में जो भी नई व्यवस्था बहाल की जाएगी वो क़ानून के अनुरुप होगी देश में सहनशीलता का महौल पैदा करेगी.

बीबीसी से हुई बातचीत में एनसीटी के एक प्रतिनिधि गुमा अल-गाम्ती ने कहा है कि लीबिया अब लोकतंत्र की राह पर होगा और गद्दाफ़ी को किसी भी रुप में इस बदलाव में बाधक नहीं बनने दिया जाएगा.

एनसीटी का कहा है कि लीबिया में अब परिस्थितियां पूरी तरह नियंत्रण में हैं.

पेरिस में लीबिया की राष्ट्रीय अंतरिम परिषद और साठ देशों के प्रतिनिधियों की ओर से लीबिया के भविष्य पर विचार विमर्श के दौरान एनसीटी के प्रमुख मुस्तफा अब्दल जलील ने कहा कि अगले 18 महीनों में देश में नया संविधान लागू कर दिया जाएगा और चुनावों की तैयारी शुरु हो जाएगी.

इस अहम सम्मलेन के बाद फ्रांस और ब्रिटेन के नेताओं का कहना था कि लीबिया में जारी नेटो कार्रवाई को लेकर सभी देशों में सहमति बनी हुई है.

‘समझौता और क्षमा’

फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सारकोज़ी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में इस बात पर इस बात पर ज़ोर दिया गया कि एनसीटी को ‘समझौते और क्षमा’ का रास्ता अपनाना चाहिए.

हालांकि फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सारकोज़ी ने कहा कि हवाई हमले तब तक जारी रहेंगे जब तक गद्दाफ़ी लीबिया की सुरक्षा के लिए ख़तरा बने हुए हैं.

फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सार्कोज़ी और ब्रिटेन के प्रधान मंत्री डेविड कैमरन ने करीब 63 देशों के प्रतिनिधियों को इस सम्मलेन में आमंत्रित किया था.

लीबिया के नेता कर्नल गद्दाफ़ी ने कहा है कि वे अपने दुश्मनों से लोहा लेते रहेंगे जबकि गद्दाफ़ी विरोधी राष्ट्रीय अंतरिम परिषद ने सियर्ट में मौजूद गद्दाफ़ी समर्थकों को आत्मसमर्पण करने के लिए एक और सप्ताह का समय दिया है.

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Image caption फ़्रांस और ब्रिटेन के नेताओं ने कहा कि लीबिया में नेटो कार्रवाई जारी रहेगी.

परिषद ने बीबीसी के साथ हुई बातचीत में इस बात पर भी ज़ोर दिया है कि गद्दाफ़ी सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी आत्मसमर्पण के मुद्दे पर लगातार बातचीत कर रहे हैं.

प्रतीकात्म है ये दिन

एनसीटी के प्रमुख मुस्तफा अब्दल जलील ने कहा कि लीबिया में समझौते और सहनशीलता का माहौल बनाना लीबियाई लोगों और समाज के हाथ में है.

उन्होंने कहा, ''ये पूरी तरह लीबियाई लोगों के हाथ में है कि वो स्थिरता, शांति और समझौते का माहौल बनाने के हमारे वादे को किस तरह सच कर दिखाते हैं.''

पेरिस स्थित बीबीसी संवाददाता क्रिस मॉरिस के मुताबिक सभी देशों की इस बैठक के लिए प्रतीकात्मक रुप से वही समय चुना गया है जब 42 साल पहले तख्ता पलट के बाद कर्नल गद्दाफ़ी ने सत्ता संभाली थी.

बीबीसी के कूटनीतिक संवाददाता जोनाथन मार्कस के मुताबिक फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देश भले ही लीबिया में राष्ट्रीय अंतरिम परिषद की गद्दाफ़ी पर जीत का जश्न नहीं मनाएंगे लेकिन इस कार्रवाई के सकारात्मक परिणामों ने इन देशों को बेहद राहत दी है.

मार्कस के मुताबिक लोकतंत्र का आश्वासन पश्चिमी अपेक्षाओं पर खरा उतरता है लेकिन लीबिया के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती लंबे संघर्ष से पैदा हुए मानवीय संकट से उबरना है.

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