इतिहास के पन्नों से

इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो पाएगें कि साल 1998 में सितंबर 4 ही के दिन गूगल की स्थापना हुई थी. आज ही दिन के 73 सालों से समुद्र के तल में पड़े टाइटेनिक जहाज़ की पहली तस्वीरें दुनिया के सामने आईं थीं.

1998 : गूगल की स्थापना

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Image caption गूगल का पहला दफ़्तर एक गैरेज में था

साल 1998 में इसी दिन गूगल को कंपनी के तौर पर रजिस्टर कराया गया था. अमरीका के स्टैनफोर्ड विश्व विद्यालय के दो शोध छात्रों लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन गूगल के संस्थापक थे.

शुरुआत में कंपनी का ध्येय वाक्य था, "दुनिया की जानकारी को व्यवस्थित करना और इसे सबके लिए उपयोगी बनाना और सबको उपलब्ध कराना."

एक विश्वविद्यालय के सर्च इंजन से शुरू हो कर आज गूगल दुनिया का सबसे बड़ा सर्च इंजन बन चुका है. मई 2011 में गूगल एक अरब यूनीक यूज़र्स वाली साईट बन गई.

गूगल के आलोचक इस पर चीज़ों को छुपाने और बढ़ाने का भी आरोप लगते हैं और इसे दुनिया के लिए एक ख़तरा बताते हैं.

गूगल अब सर्च के अलावा ई मेल सेवा जी मेल, क्लाउड कम्प्यूटिंग, सोशल नेटवर्किंग साईट गूगल प्लस, ऑरकुट और बज़, गूगल क्रोम वेब ब्राउज़र की तरह के कई उत्पाद देता है.

आज इसका मुख्य पैसा गूगल की भिन्न भिन्न वेब साइटों पर आने वाले विज्ञापनों से आता है.

1985 : डूबे टाइटेनिक की पहली तस्वीरें

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Image caption टाइटेनिक जहाज़ की अपनी पहली यात्रा शुरू करते वक़्त खींची गई तस्वीर

क़रीब 73 साल पहले डूबे मशहूर पानी के विशालकाय जहाज़ टाइटेनिक की तस्वीरें पहली बार दुनिया के सामने सितंबर 4 ही के दिन आईं.

टाइटेनिक 1500 लोगों के साथ डूब गया था. यह एक संयुक्त फ़्रान्सीसी अमरीकी अभियान था जिसका संचालन डॉ रॉबर्ट बल्लार्ड ने किया था.

यह जहाज़ समुद्र की सतह से क़रीब 4 किलोमीटर नीचे तल पर पड़ा हुआ था. इसकी तस्वीरें एक मानवरहित पनडुब्बी से ली गईं.

इस जहाज़ हादसे के दौरान जो लोग बच गए थे उनमे से जीवित लोगों ने इस जहाज़ के साथ छेड़छाड़ करने का विरोध किया.

ईवा हार्ट नामक एक महिला का कहना था, "मुझे लगता है कि यह मेरे पिता और उनके जैसे 1500 लोगों की कब्र है जिसे छेड़ा नहीं जाना चाहिए."