एनआईए के गठन से न रुकेगा आतंक:विशेषज्ञ

  • 7 सितंबर 2011
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दिल्ली हाई कोर्ट के सामने बुधवार सुबह हुए बम धमाके की जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी(एनआईए) की 20 सदस्यों की टीम करेगी जिसका नेतृत्व जम्मू कश्मीर काडर के डीआईजी मुकेश सिंह करेंगे.

इससे पहले सरकार ने धमाके की जाँच की ज़िम्मेदारी राष्ट्रीय जाँच एजेंसी को सौंपने की घोषणा की थी.

एनआईए के महानिदेशक एससी सिन्हा ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा है कि जाँच दल मे एक एसपी, दो अतिरिक्त एसपी और चार इंस्पेक्टर भी होंगे. महानिदेशक एससी सिन्हा का कहना है कि उनके दल ने घटना स्थल से फ़ोरेंसिक नमूने इकट्ठे किए हैं. इसके अलावा प्रयोगशालाओं में कुछ परीक्षण चल रहे हैं.

उनके परिणाम आने के बाद ही धमाके की प्रवृत्ति के बारे में कुछ कहा जा सकेगा.

जब धमाका हुआ तो इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व संयुक्त निदेशक मलय कृष्ण धर संयोग से उसी समय हाई कोर्ट के सामने से गुज़र रहे थे. कुछ स्पिलिन्टर उनकी कार से आकर भी टकराए.

एनआईए ज़मीनी हक़ीक़तों से दूर

इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व संयुक्त निदेशक धर का कहना है, "चिदंबरम ने एनआईए तो खड़ी कर दी है लेकिन इस संस्था के अधिकारियों को स्थानीय स्थितियों के बारे में कितना पता है? उनके पास कोई जादू है क्या? दिल्ली पुलिस को आप इसकी जाँच क्यों नहीं करने देते जो कि ज़मीनी हक़ीक़त से कहीं ज़्यादा वाक़िफ़ है?"

सीमा सुरक्षा बल के पूर्व महानिदेशक और दिल्ली पुलिस के पूर्व कमिश्नर अजयराज शर्मा का मानना है, "पिछले एक साल में भारत में करीब 12 घमाके हुए हैं यानी हर दो महीने पर एक धमाका हो रहा है. आतंक अब भारत का हिस्सा बन चुका है. इसके साथ इसे सालों रहना होगा."

अजयराज शर्मा का कहना है, "आतंक को प्रतिक्रियात्मक पुलीसिंग से कम नहीं किया जा सकता. इसके लिए प्रोएक्टिव पुलीसिंग की ज़रूरत है. एनआईए एक रिएक्टिव संगठन है. वह सिर्फ़ जाँच करता है. लेकिन इससे आतंक तो दूर नहीं हो सकता."

'आतंक एक वास्तविकता'

सुरक्षा मामलों के विश्लेषक कोमोडोर उदय भास्कर का मानना है कि भारत एक प्रॉक्सी वॉर यानि एक छद्म युद्ध लड़ रहा है जिसकी शुरुआत 1990 में हुई थी.

उनके अनुसार, "मुंबई हमलों के बाद धीरे-धीरे भारत के महानगरों को हाईप्रोफ़ाइल टारगेट बनाया जा रहा है और अब भारत के सामने नगरीय यानी शहरों में होने वाला आतंकवाद एक वास्तविकता बन गया है."

वे कहते हैं, "यह इसलिए हो रहा है क्योंकि पुलिस, ख़ुफ़िया विभाग और शासन तंत्र के बाच जो सामंजस्य होना चाहिए, वह अभी तक दिखाई नहीं दिया है."

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