लादेन की मौत और आतंक के ख़िलाफ़ लड़ाई

लादेन समर्थक इमेज कॉपीरइट Reuters

मई में पाकिस्तान के ऐबटाबाद शहर में अल क़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद से सवाल ये उठने लगे कि क्या आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई ख़त्म हो गई है?

भले ही ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद अल क़ायदा को बड़ा धक्का लगा है, लेकिन यह भी सच है कि एक दशक में अल क़ायदा का नेटवर्क इतना फैल चुका है कि सिर्फ़ लादेन के न रहने से इस पर कोई बहुत बड़ा असर नहीं पड़ेगा.

लंदन के किंग्स कॉलेज के प्रोफ़ेसर अनातोल लिवेन का मानना है कि लादेन के हाथ में अल क़ायदा का नेतृत्व सांकेतिक भर रह गया था.

लादेन के मारे जाने के क़रीब एक महीने बाद अल क़ायदा के नंबर दो नेता कहे जाने वाले अयमन अल ज़वाहिरी ने एक वीडियो के ज़रिए चेतावनी दी कि ओसामा बिन लादेन ने जिस तरह अपने जीवनकाल में अमरीका को डरा कर रखा, मौत के बाद भी उनका आतंक बना रहेगा.

चेतावनी

इमेज कॉपीरइट AP
Image caption ओबामा ने भी चेतावनी दी थी कि मामला ख़त्म नहीं हुआ

दूसरी ओर मई में ही लादेन के मारे जाने के बाद अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ख़ुफ़िया एजेंसियों का शुक्रिया तो अदा किया, लेकिन साथ ही ये चेतावनी भी दी कि मामला अभी ख़त्म नहीं हुआ है.

ऑपरेशन ओसामा के बाद अमरीका ने भी कहा था कि अल-क़ायदा प्रमुख की मौत से चरमपंथियों के ख़िलाफ़ जारी उसकी कार्रवाई का अंत नहीं हो गया है और ये लड़ाई आगे भी जारी रहेगी.

लादेन की मौत के बाद पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में हिंसा में तेज़ी आई है तो इराक़ में भी नए तरह के हमले शुरू हुए हैं.

पाकिस्तान के प्रतिबंधित गुट तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने तो ओसामा बिन लादेन की मौत का बदला लेने के लिए उसने व्यापक स्तर पर कार्रवाई की बात कही है.

सिरदर्द

इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption पाकिस्तान में हिंसा बढ़ गई है

पाकिस्तान में अमरीकी अभियान के प्रति ग़ुस्से से यह ज़ाहिर होता है कि पाकिस्तान अब भी अमरीका के लिए सरदर्द बना रह सकता है. स्थानीय तालिबान को लोगों का समर्थन बढ़ सकता है.

अमरीका के ख़िलाफ़ पाकिस्तान में जो रोष है, वो अफ़ग़ानिस्तान में शुरू हुई सैनिक कार्रवाई के समय से है. पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ते अमरीकी ड्रोन हमले ने भी लोगों की नाराज़गी बढ़ाई है.

लादेन के ख़िलाफ़ अभियान से पहले ही ड्रोन हमलों को लेकर पाकिस्तान और अमरीका के बीच रिश्ते तनावपूर्ण बने हुए थे. प्रोफ़ेसर लिवेन का मानना है कि लादेन की मौत से पाकिस्तान के स्थानीय चरमपंथी गुटों पर कोई ख़ास असर नहीं पड़ने वाला है.

प्रोफ़ेसर लिवेन की मानें तो अमरीका के लिए पाकिस्तान से भी ज़्यादा मुश्किल अफ़ग़ानिस्तान के हालात हैं.

अफ़ग़ानिस्तान

इमेज कॉपीरइट AP
Image caption अफ़ग़ानिस्तान में गठबंधन सेना पर दबाव बढ़ा है

अफ़ग़ानिस्तान में नेवी सिल्स के हेलिकॉप्टर को गिराने के बाद तालिबान ने जम कर जश्न मनाया था. अफ़ग़ानिस्तान में नए सिरे से हिंसा का दौर शुरू हुआ है.

जानकार भी मानते हैं कि हिंसा के इस ताज़े दौर में ये सवाल उठने लगा है कि गठबंधन सैनिकों को अफ़ग़ानिस्तान से हटना चाहिए या नहीं.

लादेन के मारे जाने से पहले अमरीका ने राजनीतिक धारा में तालिबान को भी शामिल करने पर बातचीत शुरू की थी, जिसका विरोध भी हुआ था. लेकिन उस समय अमरीका ने गुड तालिबान और बैड तालिबान का जुमला दिया था.

माना जा रहा है कि लादेन के मारे जाने के बाद गुड तालिबान से अमरीका की बातचीत पटरी पर नहीं चल रही है. अमरीका की मुश्किल अफ़ग़ानिस्तान है, तो पाकिस्तान भी. आने वाले समय में अमरीकी नीतियों का केंद्र यही दोनों देश रहने वाले हैं.

संबंधित समाचार