इतिहास के पन्नों से...

अगर इतिहास के पन्नों को पलटें, तो पाएंगें कि 9 सितंबर के दिन जहां आधुनिक चीन के संस्थापक माओ त्से दोंग का देहांत हो गया था, वहीं उरुग्वे में ब्रितानी राजदूत को आठ महीने की क़ैद के बाद रिहा किया गया था.

1976: माओ त्से तुंग का निधन

Image caption माओ त्से दोंग को आधुनिक चीन का संस्थापक कहा जाता है.

9 सितंबर के दिन आधुनिक चीन के संस्थापक माने जाने वाले माओ त्से तुंग की 82 साल की उम्र में मौत हो गई थी.

आधी रात को हुए उनके देहांत की घोषणा सेंट्रल कमेटी ऑफ़ चाइनीज़ कम्युनिस्ट पार्टी ने की.

चेयरमैन माओ का स्वास्थ्य काफ़ी समय से ठीक नहीं था और उन्होंने काफ़ी समय तक कोई बाहरी यात्रा भी नहीं की थी.

चीन की राजधानी में चेयरमैन माओ की मौत की ख़बर आग की तरह फैल गई. कई लोगों ने शोक जताने के लिए हाथों में काले पट्टे बांधे.

उनके शव को ग्रेट हॉल ऑफ़ पीपल में रखा गया और 18 सितंबर को टियानमैन स्क्वेयर पर उनकी शोक सभा आयोजित की गई.

1930 में माओ ने रेड आर्मी का गठन किया और उसके 6,000 मील के 'लॉग मार्च' का आयोजन किया ताकि राष्ट्रवादी ताक़तों से निबट सके.

राष्ट्रवादियों पर 1949 में जीत हासिल करने के बाद, माओ ने पीपुल्स रिपबलिक ऑफ चायना के गठन का एलान किया और उसके प्रथम नेता बने.

माओ त्से तुंग चीन में 1966 में हुई सांस्कृतिक घोषणा के अभिकल्पकार थे और चीनी साम्यवादी पार्टी के सह-संस्थापक थे.

चीन में लंबे खिचे गृह युद्ध के दौरान उन्होंने सैन्य रणनीति मे अपनी महारत और चिंतक के रूप में अपना लोहा दिखाया. माओ ने 1949 से 1976 में अपनी मृत्यु तक चीन की सत्ता संभाली थी.

1971: ब्रितानी राजनयिक आठ महीने की क़ैद के बाद छूटे

उरुग्वे में ब्रितानी राजदूत जैफ़री जैक्सन को आज ही के दिन आठ महिनों की क़ैद से आज़ादी मिली थी.

उन्हें उरुग्वे के घात लगा कर हमला करने वाले कट्टर वामपंथियों ने बंधी बना लिया था.

जैफ़री जैक्सन को रिहा करने के बाद साउथ अमरीका की राजधानी मोंतविदियो में स्थित एक गिरिजाघर के बाहर छोड़ा गया.

चर्च के पादरी ने जब दरवाज़े पर खटखटाहट सुनी और दरवाज़ा खोलने के बाद उन्होंने झट से जैफ़री को पहचान लिया.

उनके बंधकों ने क्यूबा के एक पत्रकार के साथ एक इंटरव्यू का प्रबंध किया जिसमें उन्होंने बताया कि जैफ़री को एक ऐसे कमरे में रखा गया है जिसमें कोई खिड़की नहीं है और वे फ़िट रहने के लिए कीचड़ से भरी उस चारदीवारी में ही दौड़ लगाते हैं.

ये कट्टर वामपंथी बंधक उरुग्वे की सरकार के ख़िलाफ़ थे और उनके 106 साथियों को जब जेल से रिहा किया गया, तब उन्होंने ब्रितानी राजदूत को रिहा करने का फ़ैसला किया.

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