वो 73 मिनट.....

  • 8 सितंबर 2011
आर्ती वैन व्हाई

न्यूयार्क के हज़ारों निवासियों की ही तरह आर्ती वैन व्हाई ने भी वर्ल्ड ट्रेड टॉवर पर हुए हमले को देखा था. इन हमलों ने उनकी ज़िंदगी को ही बदल कर रख दिया. उनका मानना है कि उन्हें मरने तक इसकी याद आती रहेगी.

सितंबर की उस चमकदार सुबह वे अपने ऑफ़िस से निकलकर सड़क पर आ गए थे, इसके बाद से उनकी दुनिया अपनी धुरी से कुछ अंश खिसक गई.

जिस घटना को दुनिया नौ और ग्यारह नाम के दो अंकों से जानती है, उस घटना ने उनकी ज़िंदगी को एक नया मोड़ दे दिया.

दुनिया भर के लाखों लोगों ने टीवी पर देखा कि अगवा किए गए चार विमान अमरिका में दुर्घटनाग्रस्त हुए, इनमें से ही दो विमान न्यूयॉर्क के मशहूर प्रतीक से टकराए थे.

इन धमाकों का असर इतना गहरा हुआ कि उन्हें न्यूयॉर्क छोड़ना पड़ा, जो 26 साल से उनका घर था. न्यूयॉर्क से जाकर वे पेनसिल्वेनिया के लैंकास्टर में जाकर बस गए.

घटना के 10 साल बाद वे अपने एक कमरे वाले अपार्टमेंट के एक कोन में बैठे हैं, उस दिन की घटना को याद करते हुए उनके चेहरे पर एक अजीब सी ख़ामोशी है.

वे कहते हैं, "मुझे याद है कि वह एक ख़ुशनुमा सुबह थी, जब भी मैं ख़ूबसूरत आसमान देखता हूँ, तो वह मुझे उस सुबह की याद दिला देती है."

ज़ोरदार धमाका

आर्ती हालैंड एंड नाइट नाम की एक क़ानूनी संस्था में क्लर्क के रूप में काम करते थे. उनका दफ़्तर एक इमारत की 23वीं मंज़िल पर था. यह इमारत चर्च स्ट्रीट और मिलेनियम होटल से कुछ दूरी पर है. सुबह 8:46 पर एक जोरदार धमाके से इमारत हिल गई.

उनके एक सहयोगी ने पूछा कि क्या यह बिजली के कड़कने का आवाज़ थी, तभी किसी ने चीखकर सभी लोगों को इमारत से बाहर जाने को कहा, क्योंकि एक विमान ट्विन टॉवर से टकरा गया है. इस टक्कर को देखने के लिए वैन व्हाई लिफ़्ट से उस इमारत के भूतल पर पहुंचे.

वे बताते हैं, "बाहर का माहौल एक दम रहस्यमयी था. लगा कि हम किसी दूसरी दुनिया में आ गए हैं. सारी चीज़ें बहुत धीरे-धीरे चल रही थीं."

वैन व्हाई कहते हैं, "सफेद पन्नों से ज़मीन ऐसे पट गई थी, जैसे बर्फ पड़ रही हो. मैंने उतने सारे पन्ने आज तक नहीं देखे. मैं चर्च स्ट्रीट की ओर कुछ दूरी तक गया, जहाँ टॉवर थे. जब मैंने पहली बार उत्तरी टॉवर को देखा तो मैं भौचक्का रह गया. जो मैं देख रहा था उस पर विश्वास करना मुश्किल था."

वे बताते हैं, "वहाँ एक बहुत बड़ा ब्लैक होल बन गया था. चमकीले नारंगी रंग की राख हवा में थी और टॉवर से धुआँ निकल रहा था. सड़क पर लोगों की भीड़ बढ़ती जा रही थी और सायरन की आवाज़ें भी आ रही थीं."

वैन व्हाई किस तरह की मानसिक स्थिति से होकर गुज़रे हैं इसकी गवाही उनका किराये का अपार्टमेंट देता है. वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की एक तस्वीर उनके फ्रीज पर रखी हुई है.

मैनहट्टन की ऊंची इमारतों की कई तस्वीरें उनके कमरों की शोभा बढ़ा रही हैं. उनके परिवार के मृत लोगों की तस्वीरों की तरह.

बदली ज़िंदगी

Image caption आर्ती के घर पर ऐसी तस्वीरें लगी हुई हैं

उनके कमरे की एक दीवार अख़बारों की कतरनों और उनके नाटकों की समीक्षा से भरी पड़ी हैं, वैन व्हाई एक पूर्व अभिनेता हैं. वे 9/11 के बारे में लिखते हैं और नाटकों का प्रदर्शन करते हैं. वे इसके सामने बैठकर उन क्षणों को याद करते हैं, जिन्होंने उनके जीवन को बदल कर रख दिया.

वे कहते हैं, "मुझे यह याद नहीं है कि मैं कितनी देर तक उत्तरी टॉवर को देखता रहा. मैं उसे पूरी तरह देखना चाहता था. मैं जड़वत हो गया था, तभी मुझे लगा कि वहां कुछ चीज़ें गिर रही थीं, वहाँ लोग गिर रहे थे. लोग चीख-चिल्ला रहे थे और मैं लोगों से नो...नो...नो...कह रहा था. लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर रहे थे. मैं नहीं जानता कि मैं इस तरह की प्रतिक्रिया क्यों कर रहा था. मेरा दिमाग़ कह रहा था कि मुझे उस तरफ़ जाना चाहिए."

वैन व्हाई कहते हैं, "मैं प्लाजा की ओर भागा जहाँ वे गिर रहे थे. मेरे पास सोचने का समय नहीं था. मैं टॉवर की ओर भागा. मैं लोगों से पूछ रहा था कि क्या उन्हें मदद की ज़रूरत है."

एक और आदमी वैन व्हाई के साथ दौड़ रहा था. एक क्षण के लिए वे रुके और किनारे खड़े होकर, इस भयावहता को देखा. लोग अपनी मौत कूद रहे थे. वैन व्हाई याद करते हुए कहते हैं कि वहां ज़मीन पर शरीरों का अंबार लगा हुआ था.

वैन व्हाई बताते हैं- मैंने देखा कि एक आदमी जो सूट पहने हुए था, वह गिर रहा था. मैंने सोचा कि जब आप किसी ऊंची जगह से छलांग लगाते हैं तो आप ज़मीन पर पहुँचने से पहले ही मर जाएंगे.

कुछ गार्ड दो लोगों पर इस बात के लिए चिल्ला रहे थे कि वे वर्ल्ड ट्रेड टॉवर की पांचवे नंबर की इमारत से सुरक्षित तरीक़े से बाहर आएँ. वे लिफ्ट के ज़रिए चर्च स्ट्रीट की ओर बाहर निकले.

इसी जगह से वैन व्हाई ने वर्ल्ड ट्रेड टॉवर के उत्तरी टॉवर पर विमान के टकराने के 17 मिनट बाद ही एक दूसरा विमान को दक्षिणी टॉवर से टकराते देखा.

मलबा

Image caption आर्ती के मन-मस्तिष्क पर इस हमले ने गहरी छाप छोड़ी है

वैन व्हाई बताते हैं कि इसके बाद टॉवर का मलबा गिरने लगा. यह देखकर वे पुल्टन स्ट्रीट की ओर भागे इस दौरान वे एक जगह सड़क पर गिर गए.

वे बताते हैं, "लोग मेरे ऊपर दौड़ रहे थे. मुझे लगा कि कुचले जाने से मैं मर जाऊंगा. लेकिन किसी तरह मैं उठ खड़ा हुआ. मुझे याद आ रहा है कि मैं चिल्लाया था, हे भगवान हम सबकी रक्षा करो."

वे याद करते हुए बताते हैं कि एक अफ़्रीकी-अमरीकी महिला लड़खड़ा रही थी, उनकी एक व्यापारी ने मदद की. इसके बाद वे उस आदमी की ओर भागे, जो ज़मीन पर मुँह के बल पर पड़े थे.

घुटनों के बल पर बैठकर वैन व्हाई ने देखा कि उस आदमी के सिर में गंभीर चोट लगी थी. लगा रहा था कि उसे एक इमारत से गिरे चाकू से गंभीर चोट लगी है. ख़ून से सना चाकू भी पास में ही पड़ा था.

वैन व्हाई बताते हैं, "एक आदमी ने मुझे रोककर डेनिम की एक जैकेट दी, जिसे हमने उसके खुले घाव के ऊपर रख दिया. मुझे याद आया कि मैंने उसकी घड़ी को भी सड़क पर पड़ा देखा था, उसे मैंने उठाकर उसकी पैंट की पॉकेट में रख दिया. हमने उसे सीधा किया तो देखा कि उसके काम और नाम की पट्टी लगी हुई है."

नम आँखों और टूटती आवाज़ के साथ वैन व्हाई कहते हैं, "मुझे इस बात का बड़ा अफ़सोस है कि मैंने उस पट्टी को नहीं देखा जिससे पता चल सके कि उनका नाम क्या था. मैं उसके परिजनों को खोज पाता और उन्हें बता पाता कि लोग उनके साथ हैं."

इसके बाद एक एंबुलेंस आई, उस आदमी को स्ट्रेचर पर रखने के लिए कुछ लोगों की जरूरत थी, इस समय वैन व्हाई अपना हाथ झटककर खड़े हुए और कहा कि वे पूरी तरह ठीक-ठाक हैं.

फ़ोन

Image caption अपने माता-पिता को अपनी कुशलता की ख़बर आर्ती ने फ़ोन पर दी

जह उन्हें यह याद आया कि वे अपना मोबाइल फ़ोन तो ऑफ़िस में ही छोड़ आए हैं, तो उन्होंने लोगों से उनका मोबाइल फ़ोन मांगना शुरू किया जिससे अपने माता-पिता को यह बता सकें कि वे ठीक-ठाक है. लेकिन कोई भी फ़ोन काम नहीं कर रहा था. इसके बाद उन्होंने एक कैफ़े से जाकर उन्हें फ़ोन किया.

जब वे इससे उबरे तो उन्होंने एक कानफोड़ू आवाज़ सुनी, उन्होंने अपने बाएं देखा तो पता चला कि धुआँ उनकी ओर बढ़ रहा है. दक्षिण टॉवर ढ़ह रहा था.

उस सुबह दूसरी बार उन्होंने दौड़ना शुरू कर दिया. उस समय सुबह के नौ बजकर 59 मिनट का समय हुआ था, ठीक उत्तरी टॉवर पर विमान के टकराने के ठीक 73 मिनट बाद.

कुछ समय बाद वे स्ट्रीट नंबर 43 पर स्थित अपने घर पहुँचे. यह दोपहर का वक़्त था. उस दिन के बाद से उनकी नींद अनियमित हो गई और उनके बेडरूम की लाइट हमेशा जलती रहती है.

वैन व्हाई बताते हैं, "मैं अंधेर से डर गया था. ऐसा 9/11 से पहले कभी नहीं हुआ. सुरक्षा कारणों से मैं दिन में भी लाइट को ऑन रखता था. पहले हफ़्ते मैं सुबह बहुत जल्दी उठा जाता ता और अपने माता-पिता को टेलिफ़ोन करता था. फ़ोन पर ही मैं रोता था. उस हफ़्ते मैं बहुत रोया."

इस घटना का असर यह हुआ कि वैन व्हाई ने टीवी देखना बंद कर दिया और अख़बार पढ़ना बंद कर दिया, क्योंकि वे टॉवरों से विमान टकराने का फोटो या वीडियो को नहीं देखना चाहते थे.

उनके दिमाग़ में उस घटना की उनकी अपनी छवि दर्ज है. कई बार वह बहुत साफ़-साफ़ उभर आती है.

संपर्क

उन्हें पता चला कि उनके अपार्टमेंट में रहने वाले दो लोग ग़ायब हैं और एक वकील जो टॉवरों को तरफ जाते हुए देखा गया था, माना जा रहा है कि उनकी भी मौत हो गई है. वैन व्हाई 9/11 के हादसे के बाद से रोज़ाना अपने डॉक्टर के संपर्क में रहते हैं.

हॉलैंड एंड नाइट ने मिडटाउन के एक होटल में अपना ऑफ़िस खोला, लेकिन उनका मन दो-तीन हफ़्ते तक काम पर जाने का नहीं हुआ.कुछ दिन बाद वे किराये की कार से मैरीलैंड गए, जहाँ एक हाई स्कूल के 30 साल पुराने छात्रों का सम्मेलन था. किसी जहाज़ को आता देख वे रोने लगते थे.

उन्होंने समारोह में अपना परिचय यह कहकर दिया, "मैं दुनिया के एक महान शहर न्यूयार्क से हूँ. उनके यह कहते ही लोग उठ गए और तालियाँ बजाने लगे."

वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ट्विन टावरों के गिरने से बने ग्राउंड ज़ीरो के पास स्थित उनका ऑफ़िस एक बार फिर तैयार था. लेकिन वैन व्हाई को लगा कि वहाँ वापस जाना काफ़ी ख़ौफ़नाक है और सहनीय नहीं होगा. नवंबर 2001 में उन्होंने 13 साल की नौकरी के बाद त्यागपत्र दे दिया. अब काम करना काफ़ी दर्दनाक था.

इसके बाद उन्होंने अपने अनुभवों पर अपनी कहानी लिखने पर अपना ध्यान केंद्रित किया. उन्होंने अपने मित्रों और परिजनों को भेजे ईमेल में हमलों के बारे में विस्तार से लिखा, जिसे लोगों ने दूसरे लोगों को भेजा.

प्रदर्शन

इसके बाद वैन व्हाई के पास कई अनजान लोगों के प्रशंसाभरे ईमेल मिले.

इसके बाद उन्होंने अपनी कहानी को पटकथा के रूप में विकसित करना शुरू किया. अपनी स्मृतियों को ज़िंदा रखने को वैन व्हाई ने अपना मिशन बना लिया. यह एक एकल नाटक बन गया जिसका ब्रॉडवे और लॉस एंजेलेस में इसका प्रदर्शन हुआ.

वैन व्हाई कहते हैं, "नाटक ने मुझे एक उद्देश्य दिया. 9/11 के बाद के दो साल मैंने अपने नाटक पर लगाए. नाटक के हर शो के बाद कुछ लोग मुझसे मिलते थे और मुझे अपनी कहानी बताते थे."

उनका कहना था कि पूरे अमरीका के लोगों की 9/11 को लेकर अपनी एक कहानी है. वैन व्हाई अपने नाटक का कम से कम पांच साल तक शो करना चाहते थे. लेकिन यह सिलसिला न्यूयॉर्क में जाकर थम गया. महत्वपूर्ण अख़बारों ने नाटक की ओर ध्यान नहीं दिया और कुछ समीक्षाओं में कहा कि मैं इसके ज़रिए पैसा बनाने की कोशिश कर रहा हूँ.

नया जीवन

सितंबर 2003 में वैन व्हाई ने पेसिल्वेनिया के लैंकास्टर में एक नया जीवन शुरू किया, क्योंकि वे अपने माता-पिता के साथ रहना चाहते थे.

वे कहते हैं, "मैंने यह कभी नहीं सोचा था कि मैं न्यूयॉर्क छोड़ूंगा. मुझे लगता था कि मेरे जीवन के अंतिम दिन न्यूयॉर्क में कटेंगे. लेकिन अब यह लगता है कि यही सही चीज़ है."

वे न्यूयॉर्क छोड़ने को लेकर अपराधबोध से ग्रस्त हैं. वे कहते हैं, "मैं अपने माता-पिता के नज़दीक रहना चाहता था. मैं 50 साल का हो रहा हूँ, ऐसे में लगा कि मुझे मात-पिता की ज़रूरत है. यह सुरक्षा और डर की भावना थी."

वैन व्हाई कहते हैं कि वे अन्य बच्चों से अलग थे. बाद में उन्हें अहसास हुआ कि वे समलैंगिक हैं. हाई स्कूल के बाद वे एक रूढ़िवादी क्रिश्चियन कॉलेज में कुछ दिन पढ़े. जहाँ बाइबिल और नाटक प्रमुख विषय था.

वर्ष 1977 में वे अभिनेता बनने का सपना लेकर न्यूयॉर्क चले आए, जहाँ उन्होंने क़रीब 10 साल तक थियेटर में काम के लिए संघर्ष किया.

आजकल वैन व्हाई के पास दो नैकरियाँ हैं. एक है, लैंकास्टर के पुल्टन थियेटर की बॉक्स ऑफ़िस का और दूसरा एक सुपरमार्केट में कैशियर का.

दोनों को मिलाकर उन्हें हर साल क़रीब 20 हजार डॉलर की कमाई होती है. लेकिन वे न्यूयॉर्क में 50 हज़ार डॉलर कमाते थे.

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